देश की खबरें | ‘‘डिजिटल विभाजन’’ के कारण कोविड टीकाकरण में किसी के छूटने का कोई सवाल ही नहीं है: केन्द्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि ‘‘डिजिटल विभाजन’’ के कारण कोविड-19 टीकाकरण अभियान में किसी भी व्यक्ति के छूटने का कोई सवाल ही नहीं है और को-विन प्रणाली को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों तक पहुंच की बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करने के वास्ते तैयार किया गया है।

नयी दिल्ली, 26 जून केन्द्र ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि ‘‘डिजिटल विभाजन’’ के कारण कोविड-19 टीकाकरण अभियान में किसी भी व्यक्ति के छूटने का कोई सवाल ही नहीं है और को-विन प्रणाली को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों तक पहुंच की बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करने के वास्ते तैयार किया गया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान आवश्यक आपूर्ति और सेवाओं के वितरण पर स्वत: संज्ञान मामले में उच्चतम न्यायालय में दायर एक हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि उपलब्धता या डिजिटल उपकरण या इंटरनेट के आधार पर टीकाकरण पर “कोई बाधा नहीं” है। इसमें कहा गया है कि ऑनलाइन पंजीकरण, पूर्व स्व-पंजीकरण और को-विन पर बुकिंग भी टीकाकरण सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य नहीं है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 31 मई को कहा था कि 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों को टीका लगाने के लिए विशेष रूप से डिजिटल पोर्टल को-विन पर निर्भर टीकाकरण नीति ‘‘डिजिटल विभाजन’’ के कारण सार्वभौमिक टीकाकरण के अपने लक्ष्य को पूरा करने में असमर्थ होगी।

सरकार ने अपने हलफनामे में कहा, ‘‘को-विन प्रणाली समावेशी है और प्रणाली को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों तक पहुंच की बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक लचीलापन प्रदान करने के वास्ते तैयार किया गया है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘किसी भी डिजिटल विभाजन के कारण किसी व्यक्ति के छूटने का सवाल ही नहीं है। इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं हो सकता है कि अपनाई गई तकनीक या कार्यप्रणाली के परिणामस्वरूप कुछ व्यक्ति या कोई विशेष वर्ग छूट जाता है।’’

हलफनामे में कहा गया है कि 23 जून तक, को-विन पर पंजीकृत 32.22 करोड़ लाभार्थियों में से, 19.13 करोड़ (59 प्रतिशत) लाभार्थियों ने मौके पर जाकर(ऑन साइट-वॉक इन) या गैर-डिजिटल ढंग से पंजीकरण कराया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति इंटरनेट या डिजिटल उपकरणों तक पहुंच नहीं रखता है या स्व-पंजीकरण नहीं करना चाहता है, तो वह निकटतम टीकाकरण केंद्र पर जा सकता है, जहां एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता उसे को-विन मंच पर पंजीकृत करेगा और उस व्यक्ति का टीकाकरण किया जाएगा।

हलफनामे में कहा गया है कि यह समझने योग्य है कि देश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल माध्यमों और इंटरनेट की पहुंच कम है और केंद्र इस बात से पूरी तरह अवगत है। इसमें कहा गया है कि केंद्र ने स्थिति से अवगत होने के कारण ऐसे क्षेत्रों में नागरिकों को टीका उपलब्ध कराने के लिए कई अन्य तरीके अपनाए हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now