जरुरी जानकारी | भारत में एफडीआई में कोई गिरावट नहीं: गोयल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. (तस्वीर के साथ)

(तस्वीर के साथ)

बर्न (स्विट्जरलैंड), 10 जून वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में कोई गिरावट की प्रवृत्ति नहीं है, हालांकि आवधिक उतार-चढ़ाव कभी -कभी वैश्विक ब्याज दर में बदलाव के कारण हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत में नए सिरे से विदेशी पूंजी प्रवाह देखने को मिला है। साथ ही सरकार सुझावों के लिए तैयार है और देश में एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए नए उपायों को अपनाएगी।

गौरतलब है कि पिछले 11 वित्त वर्ष (2014-25) में भारत ने 748.78 अरब अमेरिकी डॉलर के एफडीआई को आकर्षित किया, जो पिछले 11 वर्ष (2003-14) में 143 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, एफडीआई के स्रोत देशों की संख्या 2013-14 में 89 से बढ़कर 2024-25 में 112 हो गई, जो भारत की बढ़ती वैश्विक अपील को निवेश गंतव्य के रूप में दर्शाती है।

गोयल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ इन आंकड़ों को देखते हुए, मुझे नहीं लगता कि कोई गिरावट की प्रवृत्ति है, समय-समय पर कुछ बदलाव हो सकते हैं और ऐसा अन्य देशों में ब्याज दर चक्रों में बदलाव के कारण होता है। इसलिए यदि कुछ देशों में बॉण्ड प्रतिफल अधिक हो जाता है, तो पैसा उन देशों में प्रवाहित होता है। हमने एक बार फिर भारत में पैसा वापस आते देखा है।’’

उन्होंने कहा कि 2024-25 में भारत को कुल 81 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।

गोयल ने कहा कि 81 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ भारत एफडीआई वृद्धि के पथ पर वापस आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम एक ऐसी सरकार हैं जो (सुझाव) सुनती है। हम सुझावों के लिए तैयार हैं और हम हमेशा नए उपाय अपनाने के लिए तैयार हैं।’’

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, स्विट्जरलैंड के नेताओं और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के लिए आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे हैं। इसका यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देना है।

वित्त वर्ष 2021-22 में सर्वाधिक 84.83 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई हासिल हुआ था।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 24.5 प्रतिशत घटकर 9.34 अरब डॉलर रह गया, लेकिन समूचे वित्त वर्ष 2024-25 में यह 13 प्रतिशत बढ़कर 50 अरब डॉलर रहा था।

वित्त वर्ष 2024-25 में सिंगापुर 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रवाह के साथ एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा। इसके बाद मॉरीशस (8.34 अरब अमेरिकी डॉलर), अमेरिका (5.45 अरब अमेरिकी डॉलर), नीदरलैंड (4.62 अरब अमेरिकी डॉलर), संयुक्त अरब अमीरात(3.12 अरब अमेरिकी डॉलर), जापान (2.47 अरब अमेरिकी डॉलर), साइप्रस (1.2 अरब अमेरिकी डॉलर), ब्रिटेन (79.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर), जर्मनी (46.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर) और केमैन आइलैंड्स (37.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का स्थान रहा।

क्षेत्रवार, सेवा, व्यापार, दूरसंचार, मोटर वाहन, निर्माण विकास, गैर-परम्परागत ऊर्जा और रसायन क्षेत्र में निवेश बढ़ा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\