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जरुरी जानकारी | भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 6.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ने में कोई चुनौती नहीं : एमपीसी सदस्य

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और चालू वित्त वर्ष (2025-26) में इसे 6.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने में किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने रविवार को यह बात कही।

जरुरी जानकारी | भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 6.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ने में कोई चुनौती नहीं : एमपीसी सदस्य

नयी दिल्ली, 27 जुलाई भारतीय अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और चालू वित्त वर्ष (2025-26) में इसे 6.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने में किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने रविवार को यह बात कही।

कुमार ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति बेहतर बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में, एक-तिहाई से ज़्यादा वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं ऋण संकट से जूझ रही हैं... औद्योगिकीकृत अर्थव्यवस्थाएं भारी दबाव, ऊंची मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि में सुस्ती का सामना कर रही हैं।’’

कुमार ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था निर्यात या व्यापार से अधिक घरेलू खपत और घरेलू निवेश पर टिकी है। इस वजह से आज भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे चालू वित्त वर्ष और अगले साल भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.5 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने की राह में कोई दिक्कत नजर नहीं आ रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘और, आप जानते हैं, उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भी इस तरह की वृद्धि जारी रहेगी, और एक समय यह सात से 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी।’’

पिछले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भी देश की अर्थव्यवस्था इसी दर से बढ़ेगी।

मुद्रास्फीति पर एक सवाल पर कुमार ने कहा कि वर्तमान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति लगभग दो प्रतिशत है और यह काफी हद तक एमपीसी (मौद्रिक नीति समिति) या आरबीआई द्वारा अपनाई गई नीति का परिणाम है। और अब यह लक्ष्य के दायरे में आ गई है।

यह पूछे जाने पर कि क्या आरबीआई के लिए आगे दरों में कटौती की गुंजाइश है, उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि सभी विभिन्न वृहद आंकड़ों पर निर्भर करेगा।’’ अगर मुद्रास्फीति किसी महीने में दो प्रतिशत तक नीचे आ जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह इसी स्तर पर रहेगी।’’

केंद्रीय बैंक ने इस साल प्रमुख नीतिगत दर रेपो में एक प्रतिशत की कटौती की है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जून में मुख्य मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई है।

आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक समिति अगस्त में अपनी अगली द्विमासिक नीति की घोषणा करने वाली है।

कुमार ने कहा, ‘‘इसलिए, एमपीसी न केवल मुद्रास्फीति के आंकड़ों, बल्कि अन्य सभी वृहद मापदंडों के रुझान पर भी गौर करेगी। इन्हीं के आधार पर एमपीसी को किसी निष्कर्ष पर पहुंचना होगा।’’

सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया है।

अमेरिका के साथ भारत के प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर एक सवाल के जवाब में, कुमार ने कहा, ‘‘अगर हम इस समझौते को पूरा कर पाते हैं, तो हमें श्रम-प्रधान क्षेत्र में अमेरिका के विशाल बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी, जहां भारत को अपने प्रचुर श्रम संसाधनों के कारण प्रतिस्पर्धी लाभ प्राप्त है।’’

उन्होंने बताया कि भारत को अपने कृषि क्षेत्र, डेयरी क्षेत्र और कुछ अन्य क्षेत्रों को खोलने को लेकर कुछ चिंताएं हैं।

यह देखते हुए कि व्यापार वार्ताएं लेन-देन पर आधारित होती हैं, उन्होंने कहा, ‘‘कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए, हम बाजार खोलने पर सहमत होते हैं, लेकिन एक कोटा निर्धारित किया जा सकता है। इससे भागीदार देश को सीमित मात्रा में शुल्क लाभ सीमित अवधि के लिए मिलेगा।’’

देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि जहां तक कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का संबंध है तो यह 71 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 81 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, तो अच्छी वृद्धि है।

उन्होंने कहा कि शुद्ध एफडीआई का आंकड़ा कम है, क्योंकि बाहर अधिक निवेश जा रहा है। जब तक कुल एफडीआई प्रवाह अच्छा रहता है, मैं इसको लेकर अधिक चिंतित नहीं हूं।

अंकटाड की ताजा वैश्विक निवेश रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक एफडीआई प्रवाह 2024 में 11 प्रतिशत घटकर 1,500 अरब डॉलर रहा है। यह लगातार दूसरा साल है जबकि वैश्विक एफडीआई प्रवाह में गिरावट आई है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 27, 2025 12:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).