देश की खबरें | उत्तराखंड में हिमालय को लेकर अलग से योजना बनाए जाने की जरूरत : धामी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय को लेकर अलग से योजना बनाए जाने की जरूरत पर बल देते हुए सोमवार को कहा कि वह सतत पर्यटन की बात कर रहे हैं जिसे लेकर योजनायें बनायी जा रही हैं।
देहरादून, नौ सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय को लेकर अलग से योजना बनाए जाने की जरूरत पर बल देते हुए सोमवार को कहा कि वह सतत पर्यटन की बात कर रहे हैं जिसे लेकर योजनायें बनायी जा रही हैं।
'हिमालय दिवस' के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की बैठक में भी उन्होंने हिमालय के लिए अलग से योजना बनाये जाने की बात उठायी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनसंख्या सवा करोड़ है लेकिन व्यवस्था हर साल लगभग 10 करोड़ लोगों के लिए करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए राज्य में आने वाली 'फ्लोटिंग पोपुलेशन' को ध्यान में रखकर योजना बनाने के लिए नीति आयोग से अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमने सतत पर्यटन की बात की है जिसे लेकर योजनाएं बनायी जा रही हैं ।
इस मौके पर उन्होंने हिमालय के सरोकारों से जुड़े विषयों के लिए एक समिति का गठन करने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह समिति उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद यानी यूकॉस्ट के महानिदेशक दुर्गेश पंत के संयोजन में बनायी जाएगी। प्रतिवर्ष नौ सितंबर को 'हिमालय दिवस' मनाया जाता है ।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है और देहरादून में भी इस वर्ष तापमान में काफी वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि तापमान का इसी गति से बढ़ते रहना आने वाले समय के लिए चिंता की बात है।
उन्होंने कहा कि हिमालय, जल और जंगल के संरक्षण की दिशा में मिलकर प्रयास करने की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सोचना होगा कि अपनी आने वाली पीढ़ी को विरासत में हम क्या देकर जा रहे हैं।
धामी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमने तमाम आपदा देश-दुनिया में देखी हैं और इस बार भी हमारे प्रदेश में कई जगह प्राकृतिक आपदा आई। पिछले साल हमने आपदाओं पर विश्व कांग्रेस का आयोजन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय दिवस का यह आयोजन केवल एक दिन या एक सप्ताह का कार्य नहीं होना चाहिए बल्कि प्रत्येक दिन हमें प्रकृति को बचाने के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमालय के महत्व को हमें नई तरह से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए अनेक तरह के कार्य किए जा सकते हैं। इस संबंध में उन्होंने कहा कि जल स्रोतों और नदियों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में उनकी सरकार द्वारा निरंतर कार्य किये जा रहे हैं और इसके लिए स्प्रिंग एण्ड रिवर रिज्यूवनेशन अथॉरिटी का गठन किया गया है।
हिमालय को अमूल्य धरोहर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है जहां सकल पर्यावरण उत्पाद यानी जीईपी की शुरूआत की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पारिस्थितिकी और आर्थिकी में संतुलन बनाकर विकास के कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पौधरोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है, लेकिन ये सारे प्रयास जनसहभागिता से ही सफल हो पाएंगे।
कार्यक्रम में मौजूद पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक क्षेत्र में भी ले जाना होगा और हिमालय के संरक्षण के लिए कार्यरत सभी संस्थाओं को एक मंच पर लाकर कार्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमालय की भूमिका संपूर्ण देश के लिए महत्त्वपूर्ण है और हिमालय के संरक्षण के लिए विकास वैज्ञानिकों के अनुसंधान के अनुरूप होना चाहिए।
इस मौके पर टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय ने हिमालय के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने को जरूरी बताते हुए कहा कि पिघलते हिमनद एक बड़ी चिंता बने हुए हैं ।
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