जरुरी जानकारी | अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को बढ़ावा देने के लिए दुनिया को साथ आना चाहिए: आर के सिंह

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नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने बुधवार को कहा कि अंतररराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को बढ़ावा देने के लिये दुनिया के देशों को साथ आना चाहिए। इस गठबंधन में वैश्विक स्तर पर 80 करोड़ लोगों को ऊर्जा उपलब्ध कराने की संभावना है।

आईएसए की आमसभा को संबोधित करते हुए बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘‘ऊर्जा बदलाव की तुलना में सभी तक बिजली की पहुंच की समस्या का समाधान ज्यादा महत्वपूर्ण है। बिजली से वंचित लोगों के लिये ऊर्जा में बदलाव का कोई मतलब नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज दुनियाभर में 80 करोड़ लोगों को बिजली नहीं मिल रही। यह विकसित देशों की जिम्मेदारी है, वे ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करें। उनके समर्थन के बिना यह जीवाश्म ईंधन (कोयला) के जरिये होगा।’’

सिंह ने दुनिया को साथ मिलकर काम करने और आईएसए को सौर तथा नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर सभी को ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आईएसए की स्थापना वैश्विक समुदाय को एक साथ लाने के लिए की गई है। इसका मकसद हमारे प्रयासों में तालमेल बैठाना, बाधाओं को दूर करने के लिए हमारी विशेषताओं का लाभ उठाना है।’’

मंत्री ने कहा कि आईएसए सभी को ऊर्जा उपलब्ध कराने में प्राथमिक भूमिका निभा सकता है।

आईएसए आमसभा के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने के बाद से पिछले एक दशक से इसमें महत्वपूर्ण तेजी आयी है। आमसभा की बैठक में 106 देश चर्चा में भाग ले रहे हैं।

सिंह ने कहा कि सभी के लिये भरोसेमंद ऊर्जा पहुंच के लक्ष्य प्राप्त करने के लिये सौर ऊर्जा अधिक व्यावहारिक विकल्प है। इसका कारण इसका सस्ता होना और ग्रिड से इतर उपयोग की सुविधा है। ‘‘यह ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने को लेकर हमारे लिये सर्वाधिक व्यावहारिक विकल्प है।’’

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति की है। तेजी से क्षमता वृद्धि स्वच्छ और सस्ती सौर ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सिंह ने कहा, ‘‘भारत ने 2030 तक 4,50,000 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है। हमारे पास अभी गैर-जीवाश्म से इतर 1,54,000 मेगावॉट की स्थापित क्षमता है। इसके अलावा, 67,000 मेगावॉट निर्माणधीन है। भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य पटरी है। भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत 40 प्रतिशत का जो लक्ष्य रखा है, वह उससे अधिक होगा।’’

जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी ने आईएसए के कार्यों और अगुवाई को लेकर भारत, फ्रांस तथा गठबंधन के सदस्य देशों की सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत को आईएसए की अगुवाई करते हुए देखना वाकई शानदार है। भारत एक करीबी भागीदार है और अमेरिका 2030 तक 4,50,000 मेगावॉट (450 गीगावाट) नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता तक पहुंचने के भारत के लक्ष्य का पुरजोर समर्थन करता है। हमारा मानना ​​है कि यह बिल्कुल संभव है और किया जाएगा। भारत ने पहले ही एक लाख मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित कर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।’’

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