नयी दिल्ली, 12 सितंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण पर भारतीय कानून का पूरी दुनिया एक ‘मॉडल’ के रूप में अनुसरण कर सकती है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों के बीच इसका महत्व बढ़ा है।
किसानों के अधिकारों पर यहां वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने पौधों की किस्मों एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (पीपीवीएफआर) पेश करके बढ़त हासिल की है, जो खाद्य एवं कृषि के लिए पादप अनुवांशिकी संसाधन पर अंतरराष्ट्रीय संधि से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने पंजीकृत किस्मों के गैर ब्रांडेड बीजों के उपयोग, पुन: उपयोग, सुरक्षा, बिक्री और साझा करने सहित किसानों को विविध अधिकार प्रदान किये हैं।
मुर्मू ने कहा कि इसके अलावा किसान अपनी किस्मों (बीजों की) का भी पंजीकरण करा सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ हमारा देश किसानों को कई प्रकार के अधिकार प्रदान करता है। भारतीय किसान खुद की किस्मों को पंजीकृत करा सकते हैं, जिन्हें सुरक्षा मिलती है। ऐसा अधिनियम पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय उत्कृष्ट मॉडल के रूप में काम कर सकता है।’
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन द्वारा पेश चुनौतियों तथा संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के बीच इसका महत्व काफी बढ़ गया है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ जैव विविधता, वन्य जीवन, विभिन्न विदेशी पौधों एवं प्राणियों की विस्तृत श्रृंखला ने हमेशा से हमारे जीवन को समृद्ध किया है और इस ग्रह को सुंदर बनाया है। सभ्यता की शुरूआत से ही हमारे किसान ही असली इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने मानवता की भलाई के लिए प्रकृति की ऊर्जा और उदारता का उपयोग किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने कई पौधों-प्रजातियों को खो दिया है, फिर भी पौधों-प्रजातियों की कई किस्मों की रक्षा एवं उन्हें पुनर्जीवित करने के किसानों के प्रयास सराहनीय हैं, जिनका अस्तित्व आज हमारे लिए महत्वपूर्ण है।’’
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर पौध प्राधिकरण भवन का उद्घाटन और एक ऑनलाइन पोर्टल की शुरूआत भी की।
इस समारोह में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी मौजूद थे।
राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया का कृषक समुदाय इसका अग्रणी संरक्षक है और वे फसल विविधता के सच्चे संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को असाधारण शक्ति और जिम्मेदारी दी गई है और सभी को पौधों और प्रजातियों की विभिन्न किस्मों की रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ भारत विविधता से भरपूर एक विशाल देश है, जिसका क्षेत्रफल विश्व का केवल 2.4 प्रतिशत है। विश्व के पौधों की विभिन्न किस्मों और जानवरों की सभी दर्ज प्रजातियों का 7 से 8 प्रतिशत भारत में मौजूद है।’’
मुर्मू ने कहा कि जैव विविधता के क्षेत्र में भारत पौधों और प्रजातियों की विस्तृत श्रृंखला से संपन्न देशों में से एक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की यह समृद्ध कृषि-जैव विविधता वैश्विक समुदाय के लिए अनुपम निधि रही है और देश के किसानों ने कड़े परिश्रम और उद्यमिता से पौधों की स्थानीय किस्मों का संरक्षण किया है।
उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास ने भारत को 1950-51 के बाद से खाद्यान्न, बागवानी, मत्स्य पालन, दूध और अंडे के उत्पादन को कई गुना बढ़ाने में योगदान दिया है, इससे राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा पर अनुकूल प्रभाव पड़ा है।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रौद्योगिकी और विज्ञान विरासत ज्ञान के प्रभावी संरक्षक और संवर्द्धक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि-जैव विविधता संरक्षण सिर्फ कर्तव्य नहीं है, बल्कि पारिस्थितिकी के अस्तित्व के लिए महती आवश्यकता है और भारत सरकार इस उद्देश्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में समृद्ध कृषि विरासत, किसानों के प्रयासों के कारण फली-फूली है, जिन्होंने कई पौधों की किस्मों का पोषण व विकास किया है।
उन्होंने कहा कि ये किस्में न केवल जीविका स्रोत हैं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंध का जीवंत प्रमाण हैं।
तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसानोँ के सामने आने वाली चुनौतियों को समझती है एवं किसानों को उनकी आजीविका सुरक्षित करने व उनके पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के लिए आवश्यक उपकरण, संसाधन और कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित हैं।
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