नयी दिल्ली, तीन अप्रैल कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की प्रमुख सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को सरकार पर वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में मनमाने ढंग से पारित कराने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि यह विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है तथा यह समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने संसद भवन परिसर में सीपीपी की बैठक में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ संबंधी विधेयक, मनरेगा, संसद में गतिरोध और कई अन्य विषयों को लेकर सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखे प्रहार किए।
लोकसभा ने बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों के कड़े विरोध के बीच और साढ़े 10 घंटे से अधिक समय तक चर्चा करने के बाद देर रात करीब दो बजे वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ़ (निरसन) विधेयक, 2024 को पारित किया।
विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए 232 के मुकाबले 288 मतों से वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया गया। सदन ने मुसलमान वक्फ़ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘यह हमारे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं मिल रही है। इसी तरह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष (मल्लिकार्जुन) खरगे जी को बार-बार अनुरोध के बावजूद वह कहने की अनुमति नहीं दी जाती है जो वह कहना चाहते हैं और वास्तव में उन्हें कहना चाहिए। आपकी तरह मैं भी इसकी साक्षी रही हूं कि कैसे सदन हमारी वजह से नहीं, बल्कि खुद सत्तापक्ष के विरोध के कारण स्थगित होता है।’’
उन्होंने कहा कि यह एक असाधारण और चौंकाने वाली बात है क्योंकि यह विपक्ष को उन चिंताओं को उठाने से रोकने के लिए किया गया है, जिससे सरकार मुश्किल में पड़ सकती है।
सोनिया गांधी ने दावा किया, ‘‘कल वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 लोकसभा में पारित हो गया और आज यह राज्यसभा में लाया जाने वाला है। विधेयक को वास्तव में मनमाने ढंग से पारित कर दिया गया था। हमारी पार्टी की स्थिति स्पष्ट है। यह विधेयक संविधान पर ही सरेआम हमला है। यह हमारे समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ संबंधी विधेयक संविधान को कमजोर करने का एक और प्रयास है।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हम इस कानून का भी पुरजोर विरोध करते हैं।’’
सोनिया गांधी ने संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘दो साल पहले दोनों सदनों द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की हमारी याचिका को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समुदायों की महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की अन्य मांग की भी जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे वह शिक्षा हो, नागरिक अधिकार और स्वतंत्रता हो, संघीय ढांचा हो या चुनावों का संचालन हो, मोदी सरकार देश को ऐसी खाई में धकेल रही है जहां संविधान कागजों पर ही रह जाएगा।
सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जो सही और न्यायसंगत है हम उसके लिए लड़ना जारी रखें, ताकि मोदी सरकार की विफलता और भारत को एक निगरानी राज्य में बदलने की उसकी मंशा को उजागर किया जा सके।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने 2004-2014 के दौरान की गई कई पहलों की पुन: ब्रांडिंग, रीपैकेजिंग और मार्केटिंग कर उन्हें अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के रूप में बताया है।’’
सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘इसे भी हमारी अपनी जनसंपर्क की गतिविधियों के माध्यम से उजागर करने की आवश्यकता है।’’
हक
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