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देश की खबरें | बंगाली भाषी प्रवासी कामगारों को हिरासत में लिए जाने को लेकर तृणमूल और भाजपा के बीच जुबानी जंग

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देश की खबरें | बंगाली भाषी प्रवासी कामगारों को हिरासत में लिए जाने को लेकर तृणमूल और भाजपा के बीच जुबानी जंग

कोलकाता, 11 जुलाई तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ओडिशा में बंगाली भाषी प्रवासी कामगारों को हिरासत में लिए जाने को लेकर झूठ फैलाने और गरीबी को अपराध बनाने का शुक्रवार को आरोप लगाया।

वहीं, भाजपा ने पलटवार करते हुए ममता बनर्जी सरकार पर अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने और उन्हें फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने का आरोप लगाया।

यह राजनीतिक विवाद तब और बढ़ गया, जब तृणमूल कांग्रेस सांसद एवं प्रवासी मजदूर कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय पर जबरदस्त हमला किया और उन्हें ‘झूठ का सरदार’ कहा।

इस्लाम ने मालवीय से मांग की कि वे साबित करें कि ओडिशा में पकड़े गए 444 प्रवासियों में से 335 के पास पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किए गए फर्जी दस्तावेज हैं।

भाजपा नेता मालवीय पर पलटवार करते हुए इस्लाम ने उन पर कलकत्ता उच्च न्यायालय में झटका लगने के बाद ‘‘फर्जी दावे’’ करने का आरोप लगाया।

मालवीय के आरोप का जवाब देते हुए इस्लाम ने सवाल उठाया कि यदि पकड़े गए अधिकतर लोग वास्तव में बांग्लादेशी थे, तो भाजपा शासित ओडिशा सरकार ने उन्हें रिहा क्यों किया।

उन्होंने इस बात का प्रमाण मांगा कि हिरासत में लिए गए प्रवासी विदेशी थे और पूछा कि क्या ऐसे दस्तावेज कभी अदालत में पेश किए गए थे या कानूनी रूप से किसी को वापस भेजा गया।

उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) तक ने यह स्वीकार किया कि सात निर्दोष बंगालियों को गैर कानूनी तरीके से निर्वासित करना उनकी गलती थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में जारी किए गए पहचान दस्तावेजों को अस्वीकार करना भाजपा के भीतर ‘बंगाली विरोधी’ पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

इस्लाम ने आरोप लगाया कि मालवीय को यह भी समझ नहीं आया कि आधार और मतदाता पहचान पत्र केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेज हैं, राज्य सरकार द्वारा नहीं।

तृणमूल सांसद ने दावा किया, ‘‘आप दूसरे राज्यों से बंगाल द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों को अस्वीकार करने के लिए कह रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि आप कितने बंगाली विरोधी और पूर्वाग्रही हैं। क्या आधार या ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) राज्य सरकारों द्वारा जारी किया जाता है? सबसे अशालीन नेता को कम से कम यह तो पता होना चाहिए कि दिल्ली में आपके आकाओं द्वारा कौन से दस्तावेज जारी किए जाते हैं।’’

उन्होंने दोहराया कि यदि घुसपैठियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है, तो तृणमूल को उस पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि बीएसएफ ने कथित अवैध प्रवासियों को सीमा पार करने की अनुमति कैसे दी।

उन्होंने कहा कि गरीब बंगाली भाषी कामगारों को हिरासत में लेना और उन्हें निशाना बनाना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि अपराध भी है।

तृणमूल सांसद ने कहा, ‘‘अगर उन घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। अब आपको अमित शाह से पूछना चाहिए कि बीएसएफ ने उन्हें सीमा पार करने की अनुमति कैसे दी। पश्चिम बंगाल के बंगाली भाषी गरीब लोगों को परेशान करना, हिरासत में लेना और हिरासत केंद्रों में रखना गैरकानूनी, असंवैधानिक और अपराध है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा के बाद, अब आज बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, दिल्ली सरकार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से एक नाबालिग समेत छह लोगों को बांग्लादेश वापस भेजने के मामले में सवालों का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ अलोकतांत्रिक या गैरकानूनी हिरासत के बारे में नहीं - इस बार अदालत यह जानना चाहती है कि किस कानून के तहत और किस वजह से बीरभूम के मुरारई से एक बच्चे समेत छह लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा गया।’’

उन्होंने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव को बुधवार को ही इस मामले पर जवाब देने का सख्त निर्देश दिया है।

इस्लाम ने कहा, ‘‘दिल्ली से बुधवार तक जवाब मांगा गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में बंगाली भाषी प्रवासी कामगारों के अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उन पर अत्याचार समाप्त नहीं हो जाते।’’

भाजपा नेता मालवीय ने बदले में तृणमूल पर बांग्लादेशी प्रवासियों के लिए फर्जी दस्तावेजों की सुविधा प्रदान करके घुसपैठ में सहायता करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “ओडिशा में 444 संदिग्ध अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा तुरंत सामने आईं और कहा कि ये ‘निर्दोष बंगाली’ हैं, जिन्हें परेशान किया जा रहा है। लेकिन सच यह है कि इन 444 में से 335 के पास फर्जी दस्तावेज थे — जो खुद तृणमूल सरकार द्वारा जारी किए गए थे।”

मालवीय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों की बाढ़ ला रही है, जो दूसरे राज्यों में काम करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी को वोट देने के लिए बंगाल लौट आते हैं। हर राज्य को बंगाल से जारी फर्जी दस्तावेजों वाले मजदूरों या कर्मचारियों को काम पर रखते समय बेहद सतर्क रहना चाहिए। यह केवल जनसांख्यिकीय खतरा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता का विषय है।’’

तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलना अपराध है।

पार्टी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘वैध नागरिकता दस्तावेज जमा करने के बावजूद, बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों को परेशान किया जा रहा है, हिरासत में लिया जा रहा है और ‘‘अवैध’’ करार दिया जा रहा है।’’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली की जय हिंद कॉलोनी और वसंत कुंज में बंगाली भाषी निवासियों को ‘‘जबरन बेदखल’’ करने और उन्हें ‘‘व्यवस्थित रूप से प्रताड़ित’’ करने की निंदा की थी।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 11, 2025 07:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).