देश की खबरें | अस्वच्छ अस्थायी ‘शरणार्थी’ कालोनियों में मंडरा रहा है महामारी का खतरा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम सरकार के एक अतिक्रमण विरोधी (बेदखली) अभियान से हजारों लोगों को बेघर हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है और ये लोग या तो अस्थायी झोपड़ियों या फिर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

धलपुर (असम), 29 सितंबर असम सरकार के एक अतिक्रमण विरोधी (बेदखली) अभियान से हजारों लोगों को बेघर हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है और ये लोग या तो अस्थायी झोपड़ियों या फिर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

प्रदेश सरकार के इस अभियान के दौरान 12 वर्षीय एक लड़के समेत दो लोगों की मौत भी हुई थी।

दरांग जिले में अपने घरों और खेतों से बेदखल किए गए 7000 से ज्यादा लोग अब ब्रह्मपुत्र नदी के नानोइ नाले को पार कर मुश्किल हालात में रहने को मजबूर हैं। ये लोग नाले के पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने के लिये कर रहे हैं और खुले में शौच करते हैं क्योंकि उनके गांवों में बने ‘स्वच्छ भारत’ शौचालयों पर अब पुलिसकर्मियों का पहरा है जो उस जमीन के किसी हिस्से पर उन्हें प्रवेश की इजाजत नहीं देते जहां से कुछ दिनों पहले ही उन्हें निकाला गया है।

स्थानीय लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नाम न छापने की शर्तों पर कहा कि भीड़भाड़ की स्थिति, सुरक्षित पानी की कमी और खुले में शौच से क्षेत्र में महामारी फैल सकती है।

जिला प्रशासन ने हालांकि जोर देकर कहा कि वहां ट्यूबवेल और शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं, इसके अलावा विस्थापित लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए गए हैं। शिविर में रहने वालों का कहना है कि उन्हें राज्य की महत्वाकांक्षी गोरुखुटी कृषि परियोजना के लिए ‘शरणार्थी’ बनने के लिए मजबूर किया गया है।

आम लोगों और कुछ गैर सरकारी संगठनों की तरफ से रविवार को कुछ मदद और राहत पहुंचनी शुरू हुई है लेकिन मौके पर सरकारी एजेंसियां नजर नहीं आ रहीं।

विभिन्न बयानों के मुताबिक, 20 और 23 सितंबर को धालपुर-एक, दो और तीन गांवों में करीब 1200 से 1400 घरों को जमींदोज कर दिया गया जिससे वहां रह रहे करीब सात हजार लोग बेघर हो गए। जिन जगहों पर बुलडोजर चला उनमें बाजार, मस्जिद, कब्रिस्तान और मदरसे भी शामिल हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि उसकी जमीनों से बेदखली अभियान पहले दिन शांतिपूर्ण ढंग से चला लेकिन दूसरे दिन स्थानीय लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसके फलस्वरूप संघर्ष में पुलिस ने गोली चलाई जिसमें न केवल दो लोगों की मौत हो गई बल्कि पुलिसकर्मियों सहित 20 से अधिक लोग घायल हो गए।

हबीबुर रहमान ने यहां ‘पीटीआई-’ को बताया, “मेरा घर गिरा दिया गया और मेरा 10 सदस्यीय विस्तारित परिवार - मां, पत्नी, मेरे तीन बच्चे, मेरी विधवा बहन और उसके तीन बच्चे - अब खुले में नाले के किनारे रह रहे हैं।”

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