देश की खबरें | पंजाब से आए किसानों का बसेरा बनी तराई पट्टी

लखीमपुर खीरी (उप्र), छह अक्टूबर हिंसा में किसानों की मौत को लेकर इन दिनों सुर्खियों में छाया लखीमपुर खीरी जिला और आसपास की तराई पट्टी दशकों पहले पंजाब से आए सिख किसानों का बसेरा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लखीमपुर खीरी जिला और तराई पट्टी के अन्य जनपद कई पीढ़ियों से सिख किसानों का आशियाना हैं। खासकर वे काश्तकार जो अवध के नवाबों के जमाने में तत्कालीन अविभाजित पंजाब से यहां आए थे। लखीमपुर खीरी जिले से सिखों का आध्यात्मिक जुड़ाव भी है।

लखीमपुर खीरी स्थित कौड़ियावाला घाट गुरुद्वारा के ग्रंथी बलजीत सिंह बताते हैं कि गुरु नानक सन् 1554 में यहां आए थे और कुष्ठ रोग से पीड़ित कुछ लोगों का इलाज किया था।

बहराइच के एक सरकारी स्कूल में खेल शिक्षक रहे सरदार सरजीत सिंह ने बताया कि अविभाजित पंजाब के किसानों को अपने मूल वतन के मुकाबले लखीमपुर खीरी और तराई पट्टी के जिलों में जमीन बहुत सस्ती मिली, लिहाजा उन्होंने पंजाब की अपनी जमीन बेच कर यहां बड़ी-बड़ी जमीनें ले लीं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने बताया कि 1940 के दशक में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग अविभाजित पंजाब से लखीमपुर खीरी आए। उससे पहले अवध के नवाबों ने भी इस समुदाय को इस इलाके में बसने के लिए प्रोत्साहित किया था।

इलाके के बुजुर्ग सरदार प्यारा सिंह ने बताया कि लखीमपुर खीरी जिले में सिखों की आबादी तकरीबन चार लाख है। इनकी ज्यादातर तादाद पलिया, निघासन और गोला तहसीलों में है।

वहीं, बहराइच जिले के मिहींपुरवा और बिछिया इलाके में सिखों की खासी आबादी है।

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