नयी दिल्ली, 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में रविवार को पशुपालन विभाग की झांकी ने दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को प्रदर्शित किया।
झांकी के सामने के हिस्से में श्वेत क्रांति 2.0 का उल्लेख किया गया था, जिसमें एक बर्तन से दूध बहता दिख रहा था। इसके मध्य भाग में बछड़े के साथ पंढरपुरी भैंस को दिखाया गया था, जो भारत की 70 से अधिक स्वदेशी नस्लों में से एक है।
झांकी में एक महिला किसान को भैंस की देखभाल करते हुए दिखाया गया। इस दौरान एक पशु चिकित्सक टीके की एक खुराक तैयार कर रहा था, जो विभाग के प्रमुख सार्वभौमिक खुरपका और मुंहपका रोग टीकाकरण कार्यक्रम को रेखांकित करने के लिए था।
दो महिलाओं को पारंपरिक ‘बिलोना’ विधि से घी निकालते दिखाया गया और साथ ही घी की एक बोतल दिखाई गई।
झांकी के पिछले हिस्से में कामधेनु/सुरभि की एक मूर्ति प्रदर्शित की गई। कामधेनु को एक पवित्र गाय माना जाता है जो इच्छाओं को पूरा कर सकती है और समृद्धि का भी प्रतिनिधित्व करती है।
साइकिल और बायो-सीएनजी मोटरसाइकिल पर झांकी के साथ आने वाले सवारों ने भारत के हर कोने से दूध को सहकारी संग्रह केंद्रों या उपभोक्ताओं तक पहुंचाने वाले पुरुषों और महिलाओं के परिश्रम को दर्शाया।
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