देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय भारतीय मूल्य के केन्याई नागरिक की सजा पर 21 अक्टूबर को विचार करेगा

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह 21 अक्टूबर को भारतीय मूल के केन्याई नागरिक को दी जाने वाली सजा पर विचार करेगा जिसे एक बाल अभिरक्षा के मामले में दोषी ठहराया गया है। न्यायालय ने कहा कि उसको पर्याप्त मौका दिया गया, लेकिन उसने न्यायालय के समक्ष पेश नहीं होने का फैसला किया।

भारत के प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि यदि एक व्यक्ति पर्याप्त मौका दिये जाने के बावजूद पेश नहीं होने का फैसला करता है, तो अदालत ‘असहाय नहीं हो सकती’। पीठ ने कहा कि दोषी ठहराये गये पेरी कांसग्रा की अनुपस्थिति में भी मामला चलाया जायेगा।

पिछले महीने शीर्ष अदालत ने पेरी की सुरक्षित मौजूदगी और उसके नाबालिग बेटे की अभिरक्षा यहां उससे अलग रह रही पत्नी को देना सुनिश्चित करने के लिए उठाये गये कदमों के बारे में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से रिपोर्ट तलब की थी।

गत 11 जुलाई को शीर्ष अदालत ने अपने बच्चे की अभिरक्षा हासिल करने के लिए ‘धोखाधड़ी’ करने के लिए पेरी को अवमानना का दोषी ठहराया था। लेकिन पेरी इसके बाद शीर्ष अदालत में दोबारा हाजिर नहीं हुआ।

पेरी के पास ब्रिटेन और केन्या की दोहरी नगारिकता है। उसने अपने बेटे की अभिरक्षा हासिल करने के लिए, अलग रह रही पत्नी से भारतीय अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ना शुरू किया और उसने लिखित में आश्वासन दिया था कि वह शर्तों का पालन करेगा।

पेरी ने वर्ष 2020 में कथित रूप से केन्याई उच्च न्यायालय का फर्जी आदेश प्रस्तुत कर भारतीय शीर्ष अदालत से बच्चे की अभिरक्षा हासिल कर ली।

लेकिन इसके बाद उसने ना केवल शीर्ष अदालत के उन निर्देशों का पालन करने से इनकार कर दिया जिसके तहत मां को बच्चे से मिलने का अधिकार देने की बात कही गई है, बल्कि केन्याई अदालत में गुहार लगाई कि भारतीय कानून या अदालत के न्यायिक क्षेत्राधिकार को अवैध घाषित किया जाये।

इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले को वापस ले लिया और पेरी के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करने समेत कई निर्देश जारी किये।

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