देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने हत्या मामले में जम्मू-कश्मीर के सिख नेता को आरोपमुक्त करने पर लगी रोक हटाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने 2021 में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता त्रिलोचन सिंह वजीर की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर के नेता सुदर्शन सिंह वजीर को आरोपमुक्त करने पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले को शुक्रवार को रद्द कर दिया।

नयी दिल्ली, 28 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने 2021 में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता त्रिलोचन सिंह वजीर की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर के नेता सुदर्शन सिंह वजीर को आरोपमुक्त करने पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के फैसले को शुक्रवार को रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि आरोप मुक्त किये जाने पर रोक लगाना ‘‘बहुत सख्त’’ कदम है और इससे आरोपी को दी गई स्वतंत्रता पर अंकुश लगेगा या उससे यह छीनने जैसा होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘दिनांक 21 अक्टूबर, 2023 और चार नवंबर, 2024 के आदेशों को रद्द किया जाता है। उच्च न्यायालय इस निर्णय में की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना पुनरीक्षण अर्जी पर निर्णय लेगा।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पुनरीक्षण अदालत केवल दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही आरोपमुक्ति आदेश पर रोक लगा सकती है।

वजीर को दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2023 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व एमएलसी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।

अदालत ने कहा कि आरोप मुक्त करने पर रोक से सत्र अदालत को आगे बढ़ने, आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने और उस पर मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है।

निचली अदालत ने 20 अक्टूबर, 2023 को वजीर को सभी अपराधों से मुक्त कर दिया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने 21 अक्टूबर को एकपक्षीय आदेश में इस राहत पर रोक लगा दी थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार नवंबर, 2024 को वजीर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और बाद में जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोप मुक्त करने पर रोक का आदेश आरोपी को सुनवाई का मौका देने के बाद ही पारित किया जाना चाहिए।

इसने कहा, ‘‘हम अपीलकर्ता को आज से चार सप्ताह के भीतर सत्र न्यायालय के समक्ष पेश होने तथा पुनरीक्षण आवेदन के निपटारे तक सत्र न्यायालय द्वारा तय शर्तों पर जमानत देने का निर्देश देते हैं।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि अपीलकर्ता उपरोक्त निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा और पुनरीक्षण आवेदन के निपटारे तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा।’’

सत्र न्यायालय को सामान्य शर्तें लागू करने का आदेश दिया गया।

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