जरुरी जानकारी | मानसून की प्रगति के साथ खरीफ की बुवाई में कमी को पूरा कर लिया जाएगा : अधिकारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. धान जैसी खरीफ फसलों के खेती के रकबे में अबतक की कमी चिंता का विषय नहीं है और इस अंतर को चालू महीने में मानसून की प्रगति के साथ पूरा कर लिया जाएगा। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 12 जुलाई धान जैसी खरीफ फसलों के खेती के रकबे में अबतक की कमी चिंता का विषय नहीं है और इस अंतर को चालू महीने में मानसून की प्रगति के साथ पूरा कर लिया जाएगा। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पिछले सप्ताह तक खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा एक साल पहले की तुलना में 9.27 प्रतिशत घटकर 406.66 लाख हेक्टेयर रह गया।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ की मुख्य फसल धान की बुवाई का रकबा भी 24 प्रतिशत घटकर 72.24 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल लगभग 95 लाख हेक्टेयर था।

यहां तक ​​कि अरहर, तिलहन और नकदी फसलों की बुवाई भी चालू खरीफ सत्र के अंतिम सप्ताह तक कम रही है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी तक खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा कुछ पीछे है, लेकिन यह चिंता का विषय नहीं है। मानसून के आगे बढ़ने के साथ इस महीने रकबे की कमी को पूरा कर लिया जाएगा।’’

खरीफ फसलों की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है। हालांकि, जून में बारिश की कमी के कारण बुवाई में देरी हुई है। अब जुलाई की बारिश महत्वपूर्ण है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल सामान्य मानसून का अनुमान लगाया है और इस साल एक जून से छह जुलाई के बीच कुल वर्षा ‘‘सामान्य के करीब’’ रही है।

हालांकि, एक जून से छह जुलाई के बीच मध्य भारत में 10 प्रतिशत और देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दो प्रतिशत बारिश कम हुई थी।

पिछले सप्ताह जारी आईएमडी के बयान के अनुसार, छह जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख चावल उगाने वाले क्षेत्र में वर्षा की कमी 36 प्रतिशत तक थी।

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