देश की खबरें | विपक्ष ने निर्वाचन आयुक्तों के चयन संबंधी विधेयक को लेकर सरकार पर हमला बोला

नयी दिल्ली, 10 अगस्त विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्तों और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए विधेयक को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला और कहा कि यह चुनाव निकाय को "प्रधानमंत्री के हाथों की कठपुतली" बनाने का प्रयास है।

आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारतीय लोकतंत्र को "कमजोर" कर रहे हैं और नियुक्त होने वाले निर्वाचन आयुक्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति "वफादार" होंगे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह 2024 के चुनाव में "धांधली" की दिशा में एक स्पष्ट कदम है।

कांग्रेस नेताओं ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से प्रस्तावित कानून का विरोध करने की अपील करते हुए सवाल किया कि क्या बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस भी विधेयक का विरोध करने के लिए हाथ मिलाएंगे।

बीजद और वाईएसआर कांग्रेस द्वारा राज्यसभा में सरकार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर समर्थन दिया जाता रहा है। उच्च सदन में भाजपा के पास बहुमत नहीं है।

विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) विधेयक, 2023 पेश किया। विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच उन्होंने यह विधेयक सदन में पेश किया।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधा और इसे "निर्वाचन आयोग को प्रधानमंत्री के हाथों की कठपुतली बनाने का प्रयास" बताया।

वेणुगोपाल ने एक्स पर कहा, " उच्चतम न्यायालय के मौजूदा फैसले के बारे में क्या कहना है जिसके तहत एक निष्पक्ष समिति की आवश्यकता है? प्रधानमंत्री को पक्षपाती निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने की आवश्यकता क्यों महसूस होती है? यह एक असंवैधानिक, मनमाना और अनुचित विधेयक है - हम हर मंच पर इसका विरोध करेंगे।’’

सोशल मीडिया मंच ट्विटर का नाम बदलकर अब एक्स कर दिया गया है।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि आज लोकतंत्र के लिए "काला दिन" है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘‘ राज्यसभा में आज भारतीय लोकतंत्र के लिए एक 'काला दिन'; मोदी सरकार भारत के निर्चाचन आयोग को 'मोदी निर्वाचन आयोग' के तौर पर पुनर्गठित करने की कोशिश कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘... हमने भारत के लोकतंत्र पर हमले और निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वतंत्रता को ध्वस्त करने का विरोध किया, लेकिन संसदीय प्रक्रियाओं और संवैधानिक औचित्य की भावनाओं को दरकिनार करते हुए, हंगामे के बीच विधेयक को पेश किया गया।’’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने हमेशा कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के ऐसे किसी भी आदेश को पलट देगी जो उसे पसंद नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक स्थिति है और इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि प्रस्तावित समिति में भारतीय जनता पार्टी के दो और कांग्रेस के एक सदस्य होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘...जाहिर है कि जो निर्वाचन आयुक्त चुने जाएंगे, वे भाजपा के वफादार होंगे।’’

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने एक्स पर लिखा, "भाजपा खुलेआम 2024 के चुनावों के लिए धांधली कर रही है।" उन्होंने आरोप लगाया, "मोदी सरकार ने एक बार फिर बेशर्मी से उच्चतम न्यायालय के फैसले को कुचल दिया और आयोग को अपनी कठपुतली बना रही है।"

राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच पेश विधेयक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और आयुक्तों के चयन के लिए समिति में प्रधान न्यायाधीश के स्थान पर एक कैबिनेट मंत्री को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।

गोखले ने आरोप लगाया, "अब, मोदी और एक मंत्री पूरे निर्वाचन आयोग की नियुक्ति करेंगे। संयुक्त विपक्षी गठबंधन को लेकर भाजपा के दिल में डर पैदा होने के बाद यह 2024 के चुनावों में धांधली की दिशा में एक स्पष्ट कदम है।"

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट (माकपा) नेता जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ''ध्वस्त करने का प्रयास'' है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति किसी स्वतंत्र प्रक्रिया से होनी चाहिए।

राज्यसभा सदस्य ब्रिटास ने कहा कि उन्होंने इस विधेयक को पेश किए जाने के खिलाफ नियम 167 के तहत प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, ''हम सरकार के रुख और विधेयक पेश करने के तरीके की निंदा करते हैं।''

कांग्रेस नेता और लोकसभा में पार्टी के सचेतक मणिक्कम टैगोर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह यह विधेयक लाकर निर्वाचन आयोग को नियंत्रित करना चाहते हैं।

टैगोर ने एक्स पर लिखा, "मोदी और शाह निर्वाचन आयोग को नियंत्रित करना चाहते हैं, जैसा वे अभी कर रहे हैं।"

सुरजेवाला ने कहा कि विधेयक उच्चतम न्यायालय के फैसले का "सीधा उल्लंघन" है। उन्होंने कहा, ‘‘... मोदी जी को याद रखना चाहिए - संविधान और लोग आपसे ऊपर हैं और हम निर्णायक रूप से संघर्ष करेंगे।''

यह विधेयक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा की शर्तों और कार्यकाल के विनियमन से संबंधित है। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि भविष्य में निर्वाचन आयुक्तों का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे।

यदि लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है तो सदन में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को नेता प्रतिपक्ष माना जाएगा।

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