2007 में मेसी ने जिस बच्चे को गोद में लेकर फोटो खिंचवाई थी, वही आज वर्ल्ड कप फाइनल में उनके सामने खड़ा है. अर्जेंटीना के आक्रमण और स्पेन के मजबूत डिफेंस के आलावा, इस तस्वीर ने इस फाइनल को और भी दिलचस्प बना दिया है.2007 में यूनिसेफ के एक कार्यक्रम के दौरान अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक बच्चे के साथ फोटो खिंचवाई थी. आज दुनिया उस बच्चे को लामिन यामाल के नाम से जानती है जो स्पैनिश फुटबॉल टीम की ताकत है. रविवार को दोनों टीमें फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल में एक दूसरे के सामने होंगी.
इस बार का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास रहा. 48 टीमों और 104 मैचों वाला यह अब तक का सबसे बड़ा विश्व कप है, जिसकी मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको ने मिलकर की. और अब फाइनल में पहुंची हैं दो ऐसी टीमें जिनकी पहचान बिल्कुल अलग है.
एक तरफ है अर्जेंटीना. टूर्नामेंट की सबसे खतरनाक अटैकिंग टीम. दूसरी तरफ है स्पेन, जिसके डिफेंस को तोड़ना लगभग नामुमकिन साबित हुआ है. अर्जेंटीना ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा यानी 19 गोल किए हैं, जबकि स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है. यानी फाइनल में सिर्फ दो टीमें नहीं, बल्कि फुटबॉल खेलने के दो अलग-अलग तरीके भिड़ने वाले हैं. आक्रामक फुटबॉल बनाम मजबूत डिफेंस.
मेसी का आखिरी बड़ा मंच
अर्जेंटीना इससे पहले तीन बार फीफा वर्ल्ड कप जीत चुका है. अगर इस बार भी वह विजेता बनता है तो 1958 और 1962 में ब्राजील के बाद पहली बार कोई टीम लगातार दो वर्ल्ड कप अपने नाम करेगी. वहीं स्पेन 2010 के बाद अपना दूसरा विश्व कप खिताब जीतने के लिए खेल रहा है. दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों टीमों को कुछ महीने पहले भी एक दूसरे से भिड़ना था. यह मैच दक्षिण अमेरिका की चैंपियन अर्जेंटीना और यूरोप की चैंपियन स्पेन के बीच खेला जाना था. लेकिन मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा कारणों से वह मैच रद्द कर दिया गया.
मिस्र की टीम के साथ अर्जेंटीना का विवाद
अर्जेंटीना ने ग्रुप स्टेज में अल्जीरिया, ऑस्ट्रिया और जॉर्डन को हराया. नॉकआउट में उसने केप वर्डे, मिस्र, स्विट्जरलैंड और इंग्लैंड को मात देकर फाइनल का टिकट हासिल किया. लेकिन क्वार्टर फाइनल में मिस्र के खिलाफ मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. मैच अर्जेंटीना ने 3-2 से जीता, लेकिन सोशल मीडिया पर कई फुटबॉल प्रशंसकों ने दावा किया कि मिस्र के साथ रेफरी के फैसलों में न्याय नहीं हुआ. खास तौर पर कुछ विवादित फैसलों और संभावित पेनल्टी अपीलों को लेकर बहस छिड़ी. मिस्र के समर्थकों का मानना था कि उनकी टीम के साथ नाइंसाफी हुई, जबकि दूसरी ओर कई विशेषज्ञों ने रेफरी के फैसलों को खेल का हिस्सा बताया. आधिकारिक तौर पर मैच का नतीजा बरकरार रहा, लेकिन यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे विवादित मैचों में गिना गया.
स्पेन के डिफेंस से बचना मुश्किल
अगर अर्जेंटीना की ताकत उसका हमला है, तो स्पेन की ताकत उसका डिफेंस. स्पेन ने ग्रुप स्टेज में केप वर्डे से ड्रॉ खेलने के बाद सऊदी अरब और उरुग्वे को हराया. फिर नॉकआउट में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम और फ्रांस जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में जगह बनाई. सात मैचों में सिर्फ एक गोल खाना इस टीम की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है.
अगर स्पेन को फाइनल जीतना है, तो उसे मेसी को रोकना होगा कि वो खुलकर ना खेल पाएं. मिडफील्ड में गेंद पर कब्जा बनाए रखना, अर्जेंटीना के तेज काउंटर अटैक को रोकना और मिलने वाले मौकों का पूरा फायदा उठाना उसकी जीत की कुंजी होगी. युवा स्टार लामिन यामाल और स्पेन के तेज विंगर्स अगर शुरुआती दबाव बना सके, तो अर्जेंटीना की डिफेंस मुश्किल में पड़ सकती है. स्पेन की कोशिश होगी कि मैच की रफ्तार अपने हिसाब से रखे और उसे खुला, तेज मुकाबला बनने से रोके.
अगर मुकाबला लंबा खिंचता है और कम गोल वाला रहता है, तो यह स्थिति स्पेन के पक्ष में जा सकती है, क्योंकि पूरे टूर्नामेंट में उसने ऐसे मैचों को धैर्य और अनुशासन के दम पर अपने नाम किया है.
जीत के करीब कौन?
दोनों टीमें शानदार फॉर्म में हैं. स्पेन पिछले 37 मैचों से अजेय है, जबकि अर्जेंटीना लगातार 13 वर्ल्ड कप मैचों से नहीं हारी है. यानी 2022 फीफा वर्ल्ड कप में सऊदी अरब से मिली शुरुआती हार के बाद से अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप का एक भी मैच नहीं हारा है. यही वजह है कि रविवार के फाइनल को हाल के वर्षों का सबसे दमदार मुकाबला माना जा रहा है.
एक ओर दुनिया के शानदार खिलाड़ियों में गिने जाने वाले लियोनेल मेसी हैं और दूसरी ओर युवा सुपरस्टार लामिन यामाल हैं, जिन्हें फुटबॉल का भविष्य माना जा रहा है. शायद इसी वजह से यह सिर्फ एक वर्ल्ड कप फाइनल नहीं, बल्कि फुटबॉल की दो पीढ़ियों का टकराव भी है. और जब कभी आने वाले वर्षों में इस फाइनल को याद किया जाएगा, तो शायद सबसे पहले लोगों को वही पुरानी तस्वीर याद आएगी, जिसमें मेसी ने एक छोटे से बच्चे को गोद में उठाया था. और एक दिन वही बच्चा उनके सामने विश्व कप फाइनल के मुकाबले में खड़ा होगा.













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