देश की खबरें | बिहार की कई जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता के मुकाबले दोगुनी या इससे भी अधिक
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. (प्रमोद कुमार)
(प्रमोद कुमार)
पटना, 27 अप्रैल बिहार में दोषी ठहराए गए 27 कैदियों की रिहाई को लेकर जारी बहस के बीच राज्य की कई जेलों में क्षमता के मुकाबले दोगुना या इससे अधिक संख्या में कैदियों के होने का पता चला है।
राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी नवीनतम आंकड़े 59 जेलों में कैदियों की संख्या कम करने की जरूरत को रेखांकित करते हैं, जहां फिलहाल करीब 62,000 कैदी बंद है।
राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से अपनी वेबसाइट पर 31 मार्च तक अपलोड किये गए आंकड़ों के मुताबिक आठ केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेलों की क्षमता 47,750 थी, लेकिन इन जेलों में 61,891 कैदी हैं।
इसका मतलब यह हुआ कि जेलों में क्षमता के मुकाबले 30 फीसदी अधिक कैदी हैं। सबसे खराब दशा जमुई जिला जेल की है जिसकी क्षमता 188 कैदियों की है, लेकिन वहां 822 कैदी रह रहे हैं। यानी जमुई जिला जेल में तय क्षमता के मुकाबले चार गुना से अधिक कैदी हैं।
गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक जमुई जिला जेल उन 38 जेलों में शामिल है जहां स्वीकृत क्षमता के मुकाबले दोगुना या इससे अधिक कैदी हैं।
अधिकारियों ने कहा कि केवल जेल प्रबंधन में सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करने के लिए वे इस ओर इंगित कर रहे थे।
गैंगस्टर से राजनेता बने आनंद मोहन सिंह की बृहस्पतिवार को सहरसा जेल से रिहाई की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की। राज्य सरकार ने हाल ही में जेल नियमों में संशोधन करके 27 दोषियों की जल्द रिहाई की अनुमति दे दी। कैद की सजा में छूट के आदेश के तहत आनंद मोहन को जेल से रिहाई की अनुमति मिली।
वर्ष 1994 में मुजफ्फरपुर के गैंगस्टर छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार के दौरान एक युवा आईएएस अधिकारी और गोपालगंज के तत्कालीन कलेक्टर जी कृष्णैया की हत्या में कथित भूमिका के लिए आनंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
लेकिन नीतीश कुमार सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार जेल नियमावली, 2012 में संशोधन किया और अन्य बातों के साथ-साथ उस खंड को भी हटा दिया, जिसमें कहा गया था कि ‘ड्यूटी पर तैनात एक लोक सेवक की हत्या’ के लिए दोषी ठहराए गए लोगों को कैद की अवधि में छूट नहीं दी जा सकती है।
बिहार सरकार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभयानंद ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘यह सत्य है कि राज्य की जेलों में कैदियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। मुझे लगता है कि मामलों की सुनवाई में तेजी लाकर और कुछ विशिष्ट मामलों में आरोपियों को निश्चित अवधि के बाद जमानत प्रदान करके जेल में कैदियों की भीड़ को कम किया जा सकता है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)