जरुरी जानकारी | ब्याज दर में कटौती से वृद्धि को गति मिलने की धारणा सरल तरीके से नहीं कर रही काम: रतिन रॉय

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मुंबई, 11 जुलाई वरिष्ठ अर्थशास्त्री रतिन रॉय ने शनिवार को कहा कि नीतिगत दर में कटौती से आर्थिक वृद्धि को गति मिलने की धारणा सरल तरीके से काम नहीं कर रही है, क्योंकि ग्राहकों को सस्ता कर्ज नहीं मिल पा रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के निदेशक रतिन रॉय ने कहा, ऐसी धारणा है कि दर में कटौती से पूंजी की लागत कम होती है, जिससे आर्थिक वृद्धि को बल मिलता है। लेकिन यह अभी कुछ समय से काम नहीं कर रहा है।

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उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के द्वारा आयोजित वार्षित अर्थशास्त्र सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं दरों में इन कटौतियों के संबंध में रिजर्व बैंक के गवर्नर समेत उसकी मौद्रिक नीति के बयानों से सहमत नहीं हूं। मैंने इस सत्र से पहले ही उन्हें (गवर्नर को) सुना और आश्वस्त नहीं हुआ।’’

रॉय प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी थे।

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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी इससे पहले अर्थशास्त्रियों के पैनल को संबोधित किया था।

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक आर्थिक गति को सहारा देने के लिये कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद दो बार में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। नीतिगत दर में इससे पहले भी एक प्रतिशत की कटौती की गयी थी। इस बीच भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2019-20 में 4.2 प्रतिशत पर आ गयी है।

रॉय ने कहा, ‘‘यह बहुत स्पष्ट है कि यह धारणा (दर में कटौती से वृद्धि को मदद) कुछ समय से सरलीकृत तरीके से काम नहीं कर रही है। नीतिगत दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को ब्याज दर में कमी के रूप में नहीं मिल पा रहा है।’’

रॉय ने बिना गारंटी वाली ऋण योजना पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘यह वास्तव में अपने स्वयं के नियमों को तोड़ना है, संभवत: एक महान उद्देश्य के लिये। मैं जानना चाहूंगा कि वह महान उद्देश्य क्या है।"

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