देश की खबरें | मंत्री ने आशा कार्यकर्ताओं से अपने कटे हुए बाल केंद्र को भेजने का आग्रह किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सोमवार को मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) की, कथित सरकारी उदासीनता के विरोध में अपने बाल काटने और सिर मुंडवाने के लिए उनकी कड़ी आलोचना की और सुझाव दिया कि उन्हें इसके बजाय राज्य के केंद्रीय मंत्रियों के माध्यम से केंद्र सरकार को अपने ये कटे हुए बाल भेजने चाहिए।
तिरुवनंतपुरम, 31 मार्च केरल के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सोमवार को मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) की, कथित सरकारी उदासीनता के विरोध में अपने बाल काटने और सिर मुंडवाने के लिए उनकी कड़ी आलोचना की और सुझाव दिया कि उन्हें इसके बजाय राज्य के केंद्रीय मंत्रियों के माध्यम से केंद्र सरकार को अपने ये कटे हुए बाल भेजने चाहिए।
मंत्री ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को नयी दिल्ली में केंद्र के समक्ष अपना विरोध और बाल काटने का प्रदर्शन करना चाहिए था।
शिवनकुट्टी ने एक बयान में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ की थी। शिवनकुट्टी राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य करते हैं।
मंत्री ने सुरेश गोपी पर कटाक्ष करते हुए टिप्पणी की कि आशा कार्यकर्ताओं को मांगी गई वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी, भले ही केंद्रीय मंत्री उन्हें कोट और छाते वितरित करें।
उन्होंने कहा, ‘‘कई दिन हो गए हैं जब मैंने केंद्रीय श्रम मंत्री को एक पत्र भेजा था, जिसमें अनुरोध किया गया था कि आशा सहित योजना कार्यकर्ताओं को श्रमिक का दर्जा दिया जाए और केंद्रीय श्रम अधिनियम के तहत लाभ का पात्र बनाया जाए। हालांकि, मुझे अब तक कोई जवाब नहीं मिली है।’’
शिवनकुट्टी ने राज्य के केंद्रीय मंत्रियों सुरेश गोपी और जॉर्ज कुरियन से भी आग्रह किया कि वे आशा कार्यकर्ताओं द्वारा उठाई गई मांगों को मंजूरी देने के लिए केंद्र पर दबाव डालें।
उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि केरल में आशा कार्यकर्ताओं को केवल 7,000 रुपये वेतन मिलता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान ‘‘निराधार’’ है।
उनके अनुसार, निर्धारित शर्तों के तहत आशा कार्यकर्ताओं को टेलीफोन भत्ते सहित 13,200 रुपये तक का वेतन मिलता है, जिसमें 10,000 रुपये राज्य का योगदान होता है।
मंत्री शिवनकुट्टी की टिप्पणी दर्जनों आशा कार्यकर्ताओं द्वारा सोमवार को सचिवालय के बाहर अपना विरोध प्रदर्शन तेज करने के तुरंत बाद आई। आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के प्रति सरकार की कथित ‘‘उदासीनता’’ के खिलाफ विरोध के भावनात्मक संकेत के रूप में अपने बाल कटवा लिए और कुछ ने तो अपना सिर भी मुंडवा लिया।
सोमवार को विरोध प्रदर्शन का 50वां दिन है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक केंद्र के बाहर अपना आंदोलन तेज कर दिया, जो लंबे समय से जारी उनके अभियान में एक नया चरण है।
सुबह विरोध स्थल पर विभिन्न जिलों से कई आशा कार्यकर्ताओं के एकत्र होने पर भावनात्मक दृश्य सामने आए। उन्होंने विरोध स्वरूप सामूहिक रूप से अपने बाल कटवाए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
विरोध प्रदर्शन में अपना सिर पूरी तरह मुंडवाने से पहले एक प्रदर्शनकारी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और फू-फूट कर रोने लगी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)