देश की खबरें | मानवाधिकार आयोग ने 2017-18 में पुलिस द्वारा ‘एनकाउंटरों’ पर उप्र सरकार को कई नोटिस भेजे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 2017-18 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में हत्याओं के कई मामलों को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजे थे।

नयी दिल्ली, 10 जुलाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 2017-18 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में हत्याओं के कई मामलों को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजे थे।

कुख्यात अपराधी विकास दुबे शुक्रवार सुबह कानपुर के पास उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर में मारा गया जिसके बाद से इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। पुलिस ने दावा किया कि दुबे कार के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भागने की कोशिश कर रहा था।

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एनएचआरसी ने नवंबर 2018 में मुजफ्फरनगर जिले के 20 साल के इरशाद अहमद की कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या किये जाने के मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजे थे।

खबरों के अनुसार आयोग ने एक बयान में कहा कि अहमद के पिता ने कहा था कि उनके बेटे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा और उसे फर्जी मुठभेड़ में नजदीक से गोली मारी गई।

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एनएचआरसी ने तीन फरवरी, 2018 की रात को नोएडा में एक उप-निरीक्षक द्वारा कथित तौर पर 25 वर्षीय युवक की गोली मारकर हत्या की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को नोटिस भेजे थे।

आयोग ने एक बयान में कहा कि हालांकि खबरों के मुताबिक नोएडा पुलिस ने मुठभेड़ का कोई संदेश मिलने से इनकार किया है।

आयोग ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस कर्मी आजाद महसूस कर रहे हैं और ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से अघोषित समर्थन के मद्देनजर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

एनएचआरसी के अनुसार 16 सितंबर, 2017 की ऐसी ही एक खबर में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद से मुठभेड़ों में 15 लोग मारे जा चुके हैं।

आयोग ने कहा कि खबरों के मुताबिक राज्य सरकार ने मुठभेड़ों को ‘उपलब्धि करार दिया था और कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार का प्रमाण’ बताया था।

मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हवाले से एक अखबार ने 19 नवंबर, 2017 को कहा था कि ‘अपराधी या तो जेल में जाएंगे या मुठभेड़ों में मारे जाएंगे।’

जिसके बाद आयोग ने नोटिस भेजा।

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एनएचआरसी के दिशानिर्देशों के अनुसार हिरासत में मौत के मामलों में आयोग को 24 घंटे के अंदर सूचित किया जाना चाहिए और मुठभेड़ में किसी की मौत के मामले में 48 घंटे के अंदर सूचना दी जानी चाहिए।

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