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देश की खबरें | पहला मुद्दा यह है कि रोहिंग्या शरणार्थी हैं या अवैध घुसपैठिये: उच्चतम न्यायालय

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देश की खबरें | पहला मुद्दा यह है कि रोहिंग्या शरणार्थी हैं या अवैध घुसपैठिये: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, 31 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि रोहिंग्याओं से संबंधित मामलों के निपटारे में पहला महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि वे शरणार्थी हैं या अवैध घुसपैठिए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि एक बार यह तय हो जाने के बाद अन्य मुद्दे भी अनुवर्ती हो सकते हैं।

पीठ ने देश में रोहिंग्याओं से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “पहला महत्वपूर्ण मुद्दा सरल है, क्या वे शरणार्थी हैं या अवैध रूप से प्रवेश करने वाले घुसपैठिये।”

पीठ ने रोहिंग्याओं से जुड़ी याचिकाओं में उसके विचार योग्य व्यापक मुद्दों पर गौर किया।

उसने पूछा, “क्या रोहिंग्या शरणार्थी घोषित किए जाने के हकदार हैं? अगर हां, तो उन्हें कौन-सी सुरक्षा, विशेषाधिकार या अधिकार हासिल हैं?”

पीठ ने कहा कि दूसरा मुद्दा यह है कि अगर रोहिंग्या शरणार्थी नहीं हैं और अवैध रूप से प्रवेश करने वाले घुसपैठिये हैं, तो क्या उन्हें निर्वासित करने की केंद्र और राज्य सरकारों की कार्रवाई उचित थी।

उसने सवाल किया, “अगर रोहिंग्याओं को अवैध घुसपैठिया माना भी गया है, तो क्या उन्हें अनिश्चित काल तक हिरासत में रखा जा सकता है या फिर उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है, बशर्ते कि अदालत उन पर ऐसी शर्तें लगाए, जिन्हें वह उचित समझे?”

पीठ ने कहा कि याचिकाओं में उठाया गया एक अन्य मुद्दा यह है कि क्या उन रोहिंग्याओं को, जिन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है और जो शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, पेयजल, स्वच्छता और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

उसने कहा, “अगर रोहिंग्या अवैध घुसपैठिये हैं, तो क्या भारत सरकार और राज्य सरकारें कानून के अनुसार उन्हें निर्वासित करने के लिए बाध्य हैं।”

पीठ ने याचिकाओं को तीन समूहों में विभाजित किया, पहला-जो रोहिंग्याओं से संबंधित है, दूसरा-जो रोहिंग्याओं से जुड़े मुद्दों से संबंधित नहीं है और तीसरा-जो पूरी तरह से अलग मामले से संबंधित है।

उसने कहा कि तीनों समूह की याचिकाओं का निर्धारण अलग-अलग किया जाएगा और उन पर सुनवाई हर बुधवार को की जाएगी।

पीठ ने संकेत दिया कि जो लोग अवैध घुसपैठिए पाए गए हैं और उन्हें निर्वासित करने की राज्य की जिम्मेदारी के प्रश्न पर, अदालत केवल सिद्धांतों की रूपरेखा ही तय कर सकती है।

उसने सवाल किया कि इन याचिकाओं को सुनवाई के लिए क्यों सूचीबद्ध किया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि याचिकाओं में उठाए गए कई मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और मुख्य मुद्दों में से एक रोहिंग्याओं को हिरासत में लिए जाने से संबंधित है।

इनमें से एक वकील ने कहा कि रोहिंग्याओं को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

शीर्ष अदालत ने 16 मई को कुछ याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई थी, जिन्होंने दावा किया था कि महिलाओं और बच्चों सहित 43 रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमा निर्वासित करने के लिए अंडमान सागर में छोड़ दिया गया था। उसने कहा था, “जब देश कठिन समय से गुजर रहा है, तो आप ऐसे काल्पनिक विचार लेकर आ रहे हैं।”

न्यायालय ने याचिकाकर्ता मोहम्मद इस्माइल और अन्य की ओर से पेश सामग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया था तथा रोहिंग्याओं के निर्वासन से जुड़ी किसी भी भावी कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने आठ मई को कहा था कि अगर देश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थी भारतीय कानूनों के तहत विदेशी पाए जाते हैं, तो उन्हें निर्वासित किया जाएगा।

न्यायालय ने अपने पहले के आदेश का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी कि ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की ओर से जारी किए गए पहचान पत्र कानून के तहत उनकी कोई मदद नहीं कर सकेंगे।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 31, 2025 04:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).