विदेश की खबरें | द्वीपों पर पाई जाने वाली पौधों की प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

सिडनी, 19 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) द्वीप लंबे समय से अन्वेषणकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। अलग-थलग दिखने वाले ये क्षेत्र यह समझने के लिए प्राकृतिक प्रयोगशालाओं के रूप में काम करते हैं कि प्रजातियां कैसे विकसित और अनुकूलित होती हैं।

द्वीप भी प्रजातियों की विविधता के केंद्र हैं। लंबे समय से यह अनुमान लगाया जाता रहा है कि द्वीप वैश्विक जैव विविधता के लिए अनुकूल होते हैं, लेकिन ये किस हद तक अनुकूल होते हैं, यह अभी पता नहीं चल पाया है।

‘नेचर टुडे’ में प्रकाशित दुनिया के पहले अनुसंधान में, मेरे सहकर्मियों और मैंने पृथ्वी के द्वीपों पर पौधों की विविधता का अध्ययन और मानचित्रण किया। हमने पाया कि दुनिया में पौधों की कुल प्रजातियों में से 21 प्रतिशत प्रजातियां द्वीपों में पाई जाती हैं, जिसका अर्थ है कि वे ग्रह पर कहीं और नहीं पाई जातीं।

ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। द्वीपीय पौधों के विलुप्त होने का खतरा मुख्य भूमि के पौधों की तुलना में अधिक है। पौधों की प्रजातियों और उनके उगने के स्थान के बारे में विस्तृत जानकारी उनकी निगरानी व संरक्षण के लिए आवश्यक है।

दुनिया भर में द्वीपीय वनस्पतियों का मानचित्रण

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम शामिल थी। हमने दुनिया भर में लगभग 2,000 द्वीपों समेत 3,400 से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों से वनस्पति से जुड़ी जानकारियों का एक अभूतपूर्व डेटाबेस तैयार किया।

द्वीप की परि कुछ हद तक अस्पष्ट है। परंपरागत रूप से, द्वीप एक ऐसा भूभाग होता है जो पूरी तरह से पानी से घिरा होता है और महाद्वीप से छोटा होता है। इसका मतलब है कि तस्मानिया और न्यू गिनी द्वीप हैं, लेकिन मुख्य भूमि ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक महाद्वीप तो है परंतु द्वीप नहीं है। यही परि हमने इस्तेमाल की है।

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