देश की खबरें | ‘‘विस्तारवाद’’ का युग खत्म, सेना के पराक्रम ने दुनिया को देश की ताकत का संदेश दिया: मोदी

नयी दिल्ली : लेह, तीन जुलाई चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि ‘‘विस्तारवाद’’ का युग समाप्त हो चुका है तथा पूरे विश्व ने इसके खिलाफ मन बना लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने शत्रुओं को जो पराक्रम और ‘‘प्रचंडता’’ दिखायी, उससे दुनिया को देश की ताकत का संदेश मिल गया।

भारत चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे तनाव के बीच प्रधानमंत्री ने आज लेह को दौरा किया और पड़ोसी मुल्क के साथ सीमा गतिरोध के मामले को लेकर भारत की दृढ़ता के संकेत दिए।

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जवानों को संबोधित करते हुए मोदी ने भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में पिछले दिनों हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए 20 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जवानों की बहादुरी और उनके शौर्य की गाथाएं देश के कोने-कोने में गूंज रही है।

मोदी ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘भारत माता के दुश्मनों ने आपकी ‘फायर’ को भी देखी है और आपकी ‘फ्यूरी’ को भी देखा है।’’

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प्रधानमंत्री ने कहा कि कमजोर कभी शांति की पहल नहीं कर सकता और वीरता ही शांति की पूर्व शर्त होती है।

मोदी के इस दौरे को लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के आक्रामक रुख के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

वंदे मातरम की गूंज के बीच उन्होंने कहा, ‘‘हम वह लोग हैं जो बांसुरीधारी कृष्ण की पूजा करते हैं लेकिन हम वे लोग भी हैं जो उसी कृष्ण की पूजा करते है जिन्होंने सुदर्शन चक्र धारण किया था।

उन्होंने कहा कि सीमा पर जवानों ने जो वीरता दिखायी है, उसने पूरी दुनिया में भारत की ताकत का संदेश दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘देश के वीर सपूतों ने गलवान घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया है वह पराक्रम की पराकाष्ठा है। देश को आप पर गर्व है, नाज है।’’

मोदी ने सैनिकों को संबोधित करते हुए लद्दाख क्षेत्र को 130 करोड़ भारतीयों के मान-सम्मान का प्रतीक करार दिया।

लद्दाख के कई क्षेत्रों में पिछले सात सप्ताह से भारतीय और चीनी सेना के बीच सीमा को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने आज यहां के निमू का औचक दौरा किया। निमू वो जगह है जो जंस्कार की पहाड़ियों से घिरी हुई है और सिन्धु नदी के तट पर स्थित है।

प्रधानमंत्री ने वहां भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और बाद में थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘‘विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है। यह युग विकासवाद का है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीती शताब्दियों में विस्तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया और मानवता के विनाश का प्रयास किया।

उन्होंने कहा, ‘‘विस्तारवाद की जिद किसी पर सवार हो जाती है तो उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया है। और यह न भूलें इतिहास गवाह है। ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने को मजबूर हो गई है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति और मित्रता के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन शांति के लिए इस प्रतिबद्धता को भारत की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लद्दाख का ये पूरा हिस्सा, भारत का मस्तक है। 130 करोड़ भारतीयों के मान सम्मान का प्रतीक है। यह भूमि भारत के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले राष्ट्रभक्तों की धरती है।’’

उल्लेखनीय है भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। अनुमान है इसमें चीन के भी कई सैनिक हताहत हुए किंतु इस बारे में चीन की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे लेह-लद्दाख, कारगिल या सियाचिन ग्लेशियर हो, चाहे उंचे पहाड़ हों या नदियों में बहने वाला बर्फीला ठंडा पानी, ये सब भारत के सशस्त्र बलों की वीरता के प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के दुश्मनों ने हमारी सेना की शक्ति और उसकी प्रचंडता देखी है।’’

सिंधु नदी के तट पर 11,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित निमू सबसे दुर्गम स्थानों में से एक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज हर क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा रहा है, आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है और अत्याधुनिक तकनीक से यदि अपनी सेनाओं को सुसज्जित कर है तो इसके पीछे उसका एकमात्र उद्देश्य ‘‘मानव कल्याण और विश्व शांति’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत आज आधुनिक अस्त्र-शस्त्र का निर्माण कर रहा है। दुनिया के आधुनिक से आधुनिक तकनीक भारत की सेना के लिए ला रहा है तो उसके पीछे की भावना भी यही है।’’

उन्होंने कहा कि हर आक्रमण के बाद भारत और सशक्त होकर उभरा है। दुनिया की और मानवता की प्रगति के लिए शांति और मित्रता हर कोई स्वीकार करता है। हर कोई मानता है कि यह जरूरी है।

जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब सीमाओं पर आधारभूत ढांचे के निर्माण में करीब तीन गुना अधिक खर्च कर रहा है। सीमा पर सड़कें व पुल बनाने का काम भी बहुत तेजी से हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपके सम्मान, आपके परिवार के सम्मान और भारत माता की सुरक्षा को देश सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हो या आपके लिए जरूरी साजों-सामान, इन सभी पर हम बहुत ध्यान देते रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा अध्यक्ष के पद का गठन हो या नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, या फिर वन रैंक-वन पेंशन का फैसला, ‘‘देश हर स्तर पर अपनी सेनाओं और सैनिकों को मजबूत कर रहा है।’’

ब्रजेन्द्र

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