जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन के भाव में जारी है गिरावट का रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट जारी रही। सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल जैसे प्रमुख खाद्य तेलों के भाव हानि दर्शाते बंद हुए। बाकी अन्य तेल-तिलहनों के दाम पूर्ववत रहे।

नयी दिल्ली, 15 मई दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट जारी रही। सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल जैसे प्रमुख खाद्य तेलों के भाव हानि दर्शाते बंद हुए। बाकी अन्य तेल-तिलहनों के दाम पूर्ववत रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने बताया कि मलेशिया एक्सचेंज में आधा प्रतिशत की गिरावट थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में ज्यादा घट-बढ़ नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह कीमतों पर निगाह रखे और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करे, क्योंकि मौजूदा समय में सरसों खपेगा नहीं तो किसान कहां जायेगा? देशी तेल-तिलहनों के खपने की स्थिति बनाने के लिए स्थिति निर्माण करना होगा नहीं तो किसान हतोत्साहित होंगे। सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेल कीमतों के बढ़ने से महंगाई की बात कुछ निहित स्वार्थ की बहुराष्ट्रीय कंपनियों, पैकरों द्वारा खड़ी की जाती है, ताकि देशी तेल-तिलहनों को चोट पहुंचाकर देश को पूरी तरह आयात पर निर्भर कर दिया जाये। तेल की जो प्रति व्यक्ति खपत है वह दूध के मुकाबले बहुत कम है। देशी तिलहनों से प्राप्त तेल खल की कमी की वजह से दूध के दाम पिछले दिनों कई बार बढ़े हैं तो दूध के दाम बढ़ने से क्यों नहीं मुद्रास्फीति की चिंता जताई जाती है? सूत्रों ने कहा कि इन कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की साजिशों की वजह से पिछले लगभग 25 वर्षों में हम निरंतर आयात पर निर्भर होते जा रहे हैं। अगर मुद्रास्फीति की ही चिंता है तो खाद्य तेल आयात कर उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये बेचा जाना कहीं बेहतर विकल्प हो सकता है जिससे खाद्य तेल, उपभोक्ताओं को सस्ता भी मिल सकेगा। जबकि मौजूदा कोटा व्यवस्था के तहत जो खाद्य तेल आया है उसे थोक और खुदरा दोनों में प्रीमियम के साथ बेचे जाने के कारण उपभोक्ताओं की जेब ढीली होती रही।

सूत्रों ने कहा कि बंदरगाह पर आयातित खाद्य तेलों (सूरजमुखी, सोयाबीन और पामोलीन तेल) का थोक दाम लगभग बराबर ही है लेकिन खुदरा में ये तेल अलग-अलग दाम पर कैसे बिक रहे हैं? इस सूरजमुखी तेल का थोक दाम 80 रुपये लीटर है पर खुदरा में यह लगभग 150 रुपये लीटर बिक रहा है, इसी तरह सोयाबीन तेल का थोक दाम बंदरगाह पर 85 रुपये लीटर बैठता है लेकिन खुदरा में यह 140 रुपये लीटर बिक रहा है। कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं में खपत होने वाले पामोलीन तेल का बंदरगाह का थोक दाम पड़ता है लगभग 85 रुपये लीटर लेकिन खुदरा में यह तेल 105 रुपये लीटर बिक रहा है। प्रीमियम क्वॉलिटी वाले चावल भूसी (राइस ब्रान) तेल का थोक बिक्री भाव 85 रुपये लीटर और खुदरा में यह अभी 170 रुपये लीटर बिक रहा है जो पहले के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 20 रुपये लीटर की कमी करने के बाद का भाव है।

सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के दाम बढ़ने पर तेल उद्योग पर छापे डाले जाते हैं या उन्हें अपने स्टॉक का खुलासा पोर्टल पर करने को कहा जाता है। तो ऐसे में सरकार को इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पैकरों को अपने एमआरपी का खुलासा किसी पोर्टल पर करने को विवश करना चाहिये तभी उपभोक्ताओं को इनकी ‘लूट’ से बचाया जा सकेगा। सरकार ने जब खाद्य तेल कंपनियों को एमआरपी घटाने के लिए बोला तो इन्हीं लोगों ने पिछले कुछ महीनों से इन शुल्कमुक्त आयातित खाद्य तेल को लगभग दोगुने दाम पर बेचने के बाद कीमत में बहुत मामूली कमी कर खुद को पाक साफ बना लिया।

सूत्रों ने कहा कि इन्हीं वजहों से पिछले वर्षों में कई देशी तिलहन की खेती लगभग ठप हो चली है और देश निरंतर आयात पर निर्भर होता जा रहा है। इसके कुछ उदाहरण हैं- सूरजमुखी (दक्षिणी राज्य, हरियाणा, पंजाब) तोरिया (पंजाब, हरियाणा), लईया (उ.प्र.) महुआ (म.प्र., उ.प्र., राजस्थान), तरबूज बीज का तेल (गुजरात), मूंगफली (आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) जिनकी खेती बेहद मामूली रह गई है या लगभग समाप्ति की ओर है।

सूत्रों ने कहा कि बाकी चीजों का प्रबंध कर लिया जा सकता है पर किसान दोबारा लौट नहीं पायेगा। जिस तरह इस बार सरसों का हाल है वह देश में तेल-तिलहन की आत्मनिर्भरता के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 4,905-5,005 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,630-6,690 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,450 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,470-2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,240 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,580-1,660 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,580-1,690 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,540 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,750 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,100 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,300-5,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,050-5,130 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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