चंडीगढ़/हैदराबाद/बारीपदा, 17 जून पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए सैनिकों के पार्थिव शरीर बुधवार को जब उनके घरों तक पहुंचाये गये तब देशभर में शोक की लहर दौड़ गयी।
राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के कई हिस्सों में चीन विरोधी प्रदर्शन किये गये । वैसे कोरेाना वायरस लॉकडाउन के चलते लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी थी।
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कई शोकसंतप्त परिवारों के लिए पीड़ादायक प्रतीक्षा मंगलवार शाम को ही शुरू हो गयी थी जब सेना के वरिष्ठ अधिकाारियों ने एक दिन पहले वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना के साथ झड़प में 20 सैनिकों के शहीद होने की सूचना दी।
जब शहीद सैनिकों के ताबूत पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए विभिन्न राज्यों में पहुंचाये गये तब जो हृदय विदारक दृश्य सामने आया उससे 2019 के पुलवामा आतंकवादी हमले की याद ताजा हो गयी जब सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे।
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शहीदों के परिवार अपनों के चले जाने से दुख के सागर में डूबे थे लेकिन उन्होंने कहा कि कि उन्हें उनके बलिदान पर गर्व है।
कर्नल बी संतोष बाबू के पार्थिव शरीर को विशेष विमान से बुधवार को हैदराबाद लाया गया। बाद में उनका पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से उनके गृह नगर सूर्यापेट ले जाया गया।
वायु सेना स्टेशन हाकिमपेट पर विमान रात आठ बजे के आसपास उतरा। हाथ में तिरंगा झंडा लिए लोगों ने एम्बुलेंस के मार्ग में फूल बरसाए।
तेलंगाना की राज्यपाल टी सुंदरराजन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के टी रामा राव समेत अन्य लोगों ने शहीद सैन्य अधिकारी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
तेलंगाना में कई स्थानों पर लोगों और राजनीतिक दलों के सदस्यों ने शहीद कर्नल को श्रद्धांजलि दी।
हिमाचल प्रदेश के करोहटा गांव के जवान अंकुश ठाकुर के शहीद होने की खबर से पूरे गांव में उदासी छा गई है।लोगों ने बड़ी संख्या में इस गांव में पहुंचकर चीन के विरोध में नारे लगाये
भोरंज उपखंड के करोहटा गांव के 21 वर्षीय अंकुश 2018 में ही पंजाब रेजिमेंट में शामिल हुए थे। उनके पिता और दादा भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और छोटा भाई अभी छठी कक्षा में है।
ओडिशा में दो आदिवासी गांव पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में अपने बेटों की शहादत से शोकाकुल हैं।
चंद्रकांत प्रधान (28) कंधमाल जिले के रायकिया मंडल में बिअर्पंगा गांव के रहने वाले थे और नायब सूबेदार नंदूराम सोरेन मयूरभंज के रायरंगपुर के रहने वाले थे।
चंद्रकांत के पिता करुणाकर प्रधान ने कहा, ‘‘हमें गर्व है कि उसने मातृभूमि के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। ’’
उन्होंने कहा,‘‘ मेरा बेटा अपनी ड्यूटी को लेकर बेहद ईमानदार था। वह साहसी, सादगी पसंद और मेहनती था। हमें उसकी शहादत की खबर मंगलवार रात को मिली। हम उसके पार्थिक शरीर का इंतजार कर रहे हैं ।’’
छोटे-मोटे किसान प्रधान ने कहा कि उनका अविवाहित बेटा परिवार में कमाने वाला मुख्य सदस्य था। परिवार में माता-पिता के अलावा दो छोटे भाई और एक बड़ी बहन है।
उन्होंने बताया कि चंद्रकांत 2014 में सेना में भर्ती हुआ था। वह करीब दो महीने पहले आखिरी बार घर आया था।
उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने कुछ दिन पहले फोन किया था और जहां वह तैनात था वहां मौजूद तनावपूर्ण स्थिति के बारे में बताया था। चंद्रकांत इलाके में काफी लोकप्रिय थे।
ऐसा ही कुछ हाल आदिवासी बहुल मयूरभंज जिले बिजातोला ब्लॉक में 43 वर्षीय सोरेन के चमपौडा गांव का है।
सोरेन के बड़े भाई दोमान माझी ने बताया कि रायरंगपुर कॉलेज से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद सोरेन 1997 में सेना में शामिल हुए क्योंकि वह मातृभूमि की रक्षा करना चाहते थे। वह अपनी ड्यूटी के प्रति ईमानदार थे।
उन्होंने बताया कि सोरेन के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं।
माझी ने कहा, ‘‘शहादत की खबर मिलने के बाद हम सब टूट गए हैं। उसे उसके दोस्ताना स्वभाव के लिए सभी प्यार करते थे।’’
मध्यप्रदेश के रीवा जिले के मनगवां थानांतर्गत फरेंदा गांव के रहने वाले शहीद नायक दीपक की करीब छह महीने पहले शादी हुई थी।
शहीद की दादी फूल कुमारी ने बुधवार को '' को बताया, ''दीपक से कुछ दिन पहले ही आखिरी बार फोन पर मेरी बात हुई थी। तब उसने मुझसे कहा था कि लॉकडाउन जब खत्म होगा तो वह छुट्टी में घर आयेगा। लेकिन लॉकडाउन के खत्म होने पर उसके शहीद होने की खबर आई है। पूरा परिवार दुखी है।''
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