देश की खबरें | न्यायालय भ्रूण खत्म करने की महिला की याचिका को सूचीबद्ध करने पर करेगा विचार
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नयी दिल्ली, 19 जुलाई उच्चतम न्यायालय मंगलवार को एक अविवाहित महिला की उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने सहमति से संबंध के कारण गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति नहीं दी थी।
उच्च न्यायालय ने पिछले शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि इसकी अनुमति देना वास्तव में भ्रूण हत्या के समान है।
महिला की तरफ से पेश हुए वकील ने प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को बताया कि मामले के तथ्यों के मद्देनजर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
पीठ ने कहा, “हमें अभी कागजात मिले ही हैं। देखते हैं।”
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई को जारी हुए आदेश में 23 सप्ताह की गर्भवती महिला को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा था कि गर्भपात कानून के तहत परस्पर सहमति से बने संबंध से ठहरे गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं है।
उच्च न्यायालय ने हालांकि महिला की इस दलील पर केंद्र से जवाब मांगा कि अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक गर्भावस्था के चिकित्सकीय गर्भपात की अनुमति नहीं देना भेदभावपूर्ण है।
याचिकाकर्ता 25 वर्षीय महिला ने अदालत को बताया था कि उसके साथी ने उससे विवाह से इनकार कर दिया है।
उसने कहा था कि बिना विवाह के बच्चे को जन्म देने से उसे मनोवैज्ञानिक पीड़ा के साथ-साथ सामाजिक लांछन का भी सामना करना पड़ेगा और वह मानसिक रूप से मां बनने के लिए तैयार नहीं थी।
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