देश की खबरें | अदालत ने बगैर वैध कागजात के ई-रिक्शा व ऑटो रिक्शा चलने का संज्ञान लिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर बगैर ‘फिटनेस’ और पंजीकरण प्रमाणपत्र के परिचालित हो रहे ई-रिक्शा और तिपहिया (ऑटो रिक्शा) वाहनों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं करने को लेकर बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार को फटकार लगाई।
नयी दिल्ली, सात अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर बगैर ‘फिटनेस’ और पंजीकरण प्रमाणपत्र के परिचालित हो रहे ई-रिक्शा और तिपहिया (ऑटो रिक्शा) वाहनों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं करने को लेकर बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार को फटकार लगाई।
अदालत ने कहा कि ये वाहन दिनदहाड़े परिचालित हो रहे हैं और प्राधिकार (दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग) कुछ नहीं कर रहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्राधिकार कानून लागू करने के प्रति गंभीर नहीं हैं और दिल्ली सरकार को इस सिलसिले में सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।
अदालत को बताया गया कि 80,583 ई-रिक्शा ऐसे हैं जिनके फिटनेस प्रमाणपत्र की समय सीमा दिसंबर 2021 में समाप्त हो गई और वे अब भी दिल्ली की सड़कों पर चल रहे हैं। इसी तरह, 9,451 ऑटो रिक्शा के पंजीकरण समाप्त हो चुके हैं लेकिन वे यहां सड़कों पर दौड रहे हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा, ‘‘हम इस बात से हैरान हैं कि किस तरह से प्रतिवादी (दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग) ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा को दिनदहाड़े परिचालित होने दे रहा है, जिनका क्रमश: फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण समाप्त हो गया है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी सड़क पर परिचालित हो रहे प्रत्येक वाहन की फिटनेस के संबंध में नियम-कानून लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। हम प्रतिवादी को सुधारात्मक कदम उठाने और दो हफ्तों के अंदर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हैं। अगली सुनवाई 11 मई के लिए सूचीबद्ध की जाती है।’’
अदालत का यह आदेश अजीत कुमार नाम के एक व्यक्ति की याचिका पर आई है। उन्होंने अधिवक्ता विशाल खन्ना के मार्फत इस विषय पर एक याचिका दायर की थी।
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