एजेंसी न्यूज

देश की खबरें | न्यायालय ने विशेष मकोका अदालतें गठित नहीं किए जाने पर महाराष्ट्र सरकार से किए सवाल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत दर्ज मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतें नहीं बनाए जाने पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की और 2017 के भिवंडी कांग्रेस पार्षद हत्या मामले में सुनवाई पूरी करने की समय सीमा तय की।

देश की खबरें | न्यायालय ने विशेष मकोका अदालतें गठित नहीं किए जाने पर महाराष्ट्र सरकार से किए सवाल

नयी दिल्ली, 19 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत दर्ज मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतें नहीं बनाए जाने पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की और 2017 के भिवंडी कांग्रेस पार्षद हत्या मामले में सुनवाई पूरी करने की समय सीमा तय की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पार्षद हत्या मामले के कथित मुख्य साजिशकर्ता प्रशांत भास्कर म्हात्रे की जमानत याचिका का विरोध कर रहे महाराष्ट्र सरकार के वकील से पूछा कि राज्य ने विशेष कानूनों के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त अदालतें क्यों नहीं बनाईं। प्रशांत पिछले आठ साल से जेल में है।

पीठ ने शुक्रवार को वकील से कहा, ‘‘हम बार-बार कह रहे हैं कि अगर आप कोई विशेष कानून बना रहे हैं तो आपको उन मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। विशेष कानूनों के तहत दर्ज मामलों की त्वरित सुनवाई होनी चाहिए। आप मकोका मामलों के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा और विशेष अदालतें क्यों नहीं बना रहे? आप गैंगस्टर को जेल से काम करने की अनुमति क्यों दे रहे हैं?’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र के एक अन्य मामले में अदालत ने एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) अधिनियम, मकोका और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया था, अन्यथा अदालतें मुकदमे पूरा होने में देरी के कारण आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के लिए मजबूर होंगी।

वकील ने दलील दी कि उन्होंने गवाहों की सूची में कटौती की है, जिनमें से केवल 30 प्रमुख गवाहों से पूछताछ बाकी है।

उन्होंने कहा कि मार्च 2025 में जब अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी किया था, तब से उन्होंने मामले में 24 गवाहों से पूछताछ की है।

पीठ ने वकील की दलीलें दर्ज करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से उसे 13 में बरी कर दिया गया है और उस पर 2013 में भी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण पार्षद पर हमला करने का आरोप है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही 31 जनवरी, 2026 तक पूरी हो जानी चाहिए और यदि तब तक यह पूरी नहीं हुई तो आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पीठ ने अधीनस्थ अदालत से मामले की सुनवाई महीने में दो बार करने को कहा और बचाव पक्ष के वकीलों को निर्देश दिया कि वे अधीनस्थ अदालत के साथ सहयोग करें एवं स्थगन का अनावश्यक अनुरोध न करें।

बंबई उच्च न्यायालय ने म्हात्रे की जमानत याचिका सात फरवरी को खारिज कर दी थी।

प्राथमिकी के अनुसार भिवंडी-निजामपुर नगर निगम से तीन बार कांग्रेस पार्टी के पार्षद रहे मनोज म्हात्रे पर 14 फरवरी, 2017 को बंदूक, हंसिया और चाकू से बेरहमी से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

बाद में पुलिस ने हत्या के सिलसिले में प्रशांत भास्कर म्हात्रे और सात अन्य को गिरफ्तार किया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 19, 2025 11:12 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).