देश की खबरें | न्यायालय ने अपील दायर करने में देरी को लेकर मप्र सरकार की खिंचाई की, सार्वजनिक धन की बर्बादी बताया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय के आदेशों के खिलाफ लगभग 400 दिनों की देरी से अपील दायर करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की खिंचाई की तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने और सार्वजनिक धन बचाने के उपाय करने को कहा।

नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय के आदेशों के खिलाफ लगभग 400 दिनों की देरी से अपील दायर करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की खिंचाई की तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने और सार्वजनिक धन बचाने के उपाय करने को कहा।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह राज्य सरकार को नये विधि स्नातकों की नियुक्ति करने का निर्देश देगी, ताकि वे यह निर्णय ले सकें कि किन मामलों में उच्चतम न्यायालय में अपील की जानी चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘नये विधि स्नातकों की नियुक्ति से यह निर्णय लेने में मदद मिलेगी कि किस मामले में राज्य को अपील दायर करने की जरूरत है। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।’’

न्यायालय ने कहा कि अनावश्यक मामले सार्वजनिक धन की बर्बादी है। शीर्ष अदालत ने राज्य के विधि सचिव एन पी सिंह को तलब कर दीवानी विवाद में 177 दिनों की देरी से अपील दायर करने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।

यह अपील उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें राज्य की याचिका को 656 दिनों की देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया था।

शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए विधि सचिव ने कहा कि उन्हें शीर्ष न्यायालय में अपील दायर करने के लिए अपनाई गई सही प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने अगस्त 2024 में कार्यभार संभाला है।

राज्य की ओर से न्यायालय में पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता एस वी राजू ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्थानीय जिलाधिकारी ने राज्य की अपील दायर करने के बारे में निर्णय लिया।

पीठ ने संबंधित जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख पर उसके समक्ष उपस्थित होकर बताएं कि उन्होंने 177 दिनों की देरी से दीवानी विवाद में अपील दायर करने का फैसला क्यों किया और ऐसे मामलों को दायर करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

राजू ने कहा कि जिलाधिकारी के बजाय राज्य सरकार से इस तरह का निर्णय लेने के तौर-तरीकों के बारे में पूछा जाना चाहिए। पीठ ने जिलाधिकारी को तलब करने के अपने आदेश को संशोधित करने से इनकार कर दिया, लेकिन सरकार से राज्य स्तर पर अपनाई गई प्रणाली के बारे में बताने को कहा।

पीठ ने विधि सचिव से कहा, ‘‘आप न्यायालय की मंशा समझ गए हैं। जब आप भोपाल वापस जाएं तो संबंधित मंत्री सहित सभी को आदेश समझाएं। अनावश्यक मुकदमे दायर करना सार्वजनिक धन की बर्बादी है।’’

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च के लिए निर्धारित की है।

शीर्ष अदालत ने 31 जनवरी को चुटकी लेते हुए कहा, ‘‘हम उस साहस की प्रशंसा करते हैं जिसके साथ मध्यप्रदेश सरकार 300/400 दिनों की देरी से इस अदालत में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर कर रही है।’’

न्यायालय ने कहा था कि मामले दायर करना समस्या नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि ‘‘उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी विशेष आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय कौन ले रहा है?’’

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