देश की खबरें | प्रधान न्यायाधीश ने मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के हस्तक्षेप की आशंका को दूर किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमण ने मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप की आशंका को मंगलवार को दूर करने का प्रयास किया और कहा कि भारतीय न्यायपालिका विदेशी संस्थाओं सहित सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करती है।
नयी दिल्ली, 21 जून भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमण ने मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप की आशंका को मंगलवार को दूर करने का प्रयास किया और कहा कि भारतीय न्यायपालिका विदेशी संस्थाओं सहित सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करती है।
न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में, मध्यस्थता प्रक्रिया में घरेलू अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप के संबंध में पक्षों के मन में कुछ आशंकाएं रही हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि भारतीय अदालतें मध्यस्थता के पक्ष में रही हैं। भारत में अदालतें मध्यस्थता की सहायता और समर्थन करती हैं तथा निर्णय के मूल हिस्से को मध्यस्थ न्यायाधिकरण पर छोड़ देती हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय न्यायपालिका को कानून के शासन को सर्वोपरि महत्व देने के लिए जाना जाता है। भारतीय न्यायपालिका दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सदा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है। आप सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार करने के लिए भारतीय न्यायपालिका की पूर्ण स्वतंत्रता और उसकी अंतर्निहित संवैधानिक ताकत पर भरोसा कर सकते हैं।”
न्यायमूर्ति रमण इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स की सालाना बैठक में "वैश्वीकृत दुनिया में मध्यस्थता - जर्मनी में डॉर्टमुंड में भारतीय अनुभव" विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के संवैधानिक न्यायालयों - उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय को सरकार के प्रत्येक कार्य की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, “वे किसी भी ऐसे कानून को रद्द कर सकते हैं जो संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। वे कार्यपालिका के मनमाने कदमों को भी खारिज कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि भारतीय अदालतें मूल देश के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं और भारतीय अदालतों के सामने सभी समान हैं। उनहोंने कहा कि भारतीय अदालतों ने समय के साथ, विवादों की मध्यस्थता के लिए व्यापक दायरे की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘‘भारतीय अदालतों के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के महत्व को और बढ़ा दिया है, खासकर तब, जब बात भारत और जर्मनी जैसे देशों की आती है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते, लाइसेंसिंग अधिकार, रॉयल्टी अधिकार और ऐसे अन्य आईपीआर से संबंधित समझौते अक्सर उद्योग जगत के बीच मध्यस्थता समझौतों के विषय होते हैं।”
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 21, 2022 05:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

