देश की खबरें | सपा नीत गठबंधन से अलग हुए राजभर के सामने 2024 के लिए नया साझेदार ढूंढ़ने की चुनौती

लखनऊ, 30 जुलाई समाजवादी पार्टी (सपा) नीत गठबंधन से अलग होने के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के लिए अब नये चुनावी साझेदार की तलाश करना एक चुनौती बन गई है। क्योंकि अधिकांश विपक्षी दल विश्वास की कमी का हवाला देते हुए उनके संगठन में बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

सुभासपा के सूत्रों ने कहा कि राजभर ने 2024 के आम चुनाव के लिए बसपा और कांग्रेस के साथ गठजोड़ करने के प्रति उत्सुकता दिखाई है, लेकिन उन्हें बहुत कम सफलता मिली।

सपा से गठबंधन टूटने के बाद सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की तरफ हाथ बढ़ाने की कोशिश की तो बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनन्द ने उन्हें 'स्वार्थी' बताते हुए सावधान रहने की जरूरत पर जोर दिया।

दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक सिंह ने भी राजभर की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए।

बसपा और कांग्रेस नेता की टिप्पणियों को नजरअंदाज करते हुए सुभासपा अध्यक्ष ने गठबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाया और कहा कि कांग्रेस में सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी और बसपा में मायावती ही फैसले ले सकती हैं।

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनन्द ने सोमवार को किए एक ट्वीट में किसी का नाम लिए बगैर कहा, "बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी के शासन,प्रशासन, अनुशासन की पूरी दुनिया तारीफ करती है। लेकिन कुछ अवसरवादी लोग भी बहन जी के नाम के सहारे अपनी राजनीतिक दुकान चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे स्वार्थी लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।"

आनन्द का यह बयान ऐसे वक्त आया जब राजभर बसपा से हाथ मिलाने की ख्वाहिश जता रहे थे। रविवार को जौनपुर में संवाददाताओं से बातचीत में राजभर ने कहा था कि उनका व्यक्तिगत रूप से मानना है कि अब बसपा से हाथ मिलाया जाना चाहिए।

हालांकि, आनन्द के ट्वीट के ठीक एक दिन बाद सुभासपा महासचिव और राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने मंगलवार को कहा था कि उनकी पार्टी ने ना तो बसपा से कोई संपर्क किया और ना ही गठबंधन के बारे में कोई बातचीत हुई है।

कांग्रेस के पूर्व विधान पार्षद दीपक सिंह ने 'पीटीआई—' से बातचीत में कहा, ''राजभर में विश्वसनीयता की कमी रही है। उन्हें यह प्रमाणित करना पड़ेगा कि वह भरोसे के हैं।''

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