नयी दिल्ली, दो मई देश के सभी शिक्षण संस्थानों के परिसर वर्ष 2030 तक ‘कार्बन न्यूट्रल’ होंगे जिससे वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन के मामले में ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। यह घोषणा पूर्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने की।
पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) टीईआरआरई फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2030 तक सभी शिक्षण संस्थान परिसरों को ‘कार्बन न्यूट्रल’ बनाने की नयी पहल ‘यू75 : विश्वविद्यालय परिसर में ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन की शुरुआत करने के मौके पर जावडेकर ने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति ‘जरूरी संवेदनशीलता’ पैदा होगी जिनका भविष्य हमारी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जारी लड़ाई पर निर्भर करेगा।
स्मार्ट कैम्पस क्लाउड नेटवर्क (एससीसीएन) से जुड़े 450 से अधिक विश्वविद्यालय और कॉलेज भी ‘कार्बन न्यूट्रल’ आंदोलन से जुड़े हुए हैं।
पूर्व में मानव संसाधन मंत्रालय का प्रभार भी संभाल चुके जावेडकर ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को ऊर्जा और जल संरक्षण करने और ऊर्जा उत्पादन करने, और वृक्ष लगाने, कचरे को संपत्ति में तब्दील करने और परिसर में ई-वाहनों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर सचिव एरिक सोलहेम ने इस पहल की प्रशंसा की और कहा कि वैश्विक पर्यावरण चुनौतियों से निपटने के लिए ‘‘ हमें जलवायु परिवर्तन को जनता का मुद्दा बनाना होगा।’’
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों को सलाह दी कि ‘‘ वे भारतीय परंपरा से प्रेरणा लें जो प्रकृति का सम्मान करती है।’’
राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (नैक) के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि 75 विश्वविद्यालय को ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन को लेकर आदर्श स्थापित करना चाहिए और ‘आजादी का अमृतकाल’ में और 750 विश्वविद्यालयों व 7500 महाविद्यालयों को यह लक्ष्य हासिल करना चाहिए।
गौरतलब है कि कार्बन न्यूट्रल का अभिप्राय उक्त क्षेत्र या इकाई में उत्सर्जित कार्बन के अनुपात में उतनी ही उसे सोखने की क्षमता से है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY