इस मामले में लापरवाही बरतने के लिए सोमवार को एक डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है।
मऊगंज निवासी राम विशाल कुशवाहा ने बताया, ‘‘मेरे बेटे विवेक कुशवाहा (22) की तबीयत रक्षाबंधन के बाद खराब हुई थी। मऊगंज में इलाज कराया गया। राहत नहीं मिली तो तीन अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। संजय गांधी अस्पताल में पहले आईसीयू में रखा गया और बाद में कोविड-19 सेंटर में डाल दिया गया।’’
उन्होंने बताया, ‘‘हमें अब तक कोविड-19 की उसकी जांच रिपोर्ट भी नहीं दी गई है। वह कोरोना वायरस संक्रमित था या नहीं, यह हमें अब तक पता नहीं है।’’
कुशवाहा ने बताया, ‘‘अपने बेटे को कोविड सेंटर में भर्ती कराकर हम इंतजार कर रहे थे कि उसके बारे में कोई सूचना मिलेगी, लेकिन हमें कोई सूचना नहीं दी गई।’’
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उन्होंने कहा कि तीन-चार बाद में मृतक का चचेरा भाई रामचन्द्र कुशवाहा पहुंचा तो उसने विवेक की सुध लेनी शुरू की तो पता चला कि विवेक की मौत हो गई है। मौत की जानकारी दिये बगैर ही उसके शव को सीधे शवगृह में भेज दिया गया।
इसके बाद परिजनों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ यत्नेश त्रिपाठी से परिजनों ने संपर्क किया तो नौ अगस्त को मृतक का शव देखने के लिए उन्हें बुलाया गया लेकिन अस्पताल से विवेक का शव गायब मिला।
मृतक युवक के पिता ने बताया कि जिस बंधे हुए बैग में विवेक के नाम की पर्ची लगी थी, उसको खोलने पर देखा तो उसके अंदर किसी बुजुर्ग का शव रखा था।
आक्रोशित परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और कमिश्नर कार्यलय का घेराव किया और लापरवाही बरतने के लिए सीएमएचओ सहित डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की।
इसी बीच, इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रीवा संभाग के कमिश्नर राजेश कुमार जैन ने लापरवाही बरतने के लिए मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डॉ राकेश पटेल को निलंबित कर दिया है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि शायद अस्पताल प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही उनके बेटे के शव का अन्य शवों के साथ अंतिम संस्कार कर दिया और इस बारे में सच छिपाया जा रहा है ।
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