देश की खबरें | मतदाता सूची पुनरीक्षण का मनमाना फैसला वापस लेना चाहिए: दीपांकर भट्टाचार्य
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपने स्पष्टीकरण से और भी भ्रम पैदा कर रहा है, जबकि इसे इस मनमाने निर्णय को वापस लेना चाहिए।
नयी दिल्ली, एक जुलाई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपने स्पष्टीकरण से और भी भ्रम पैदा कर रहा है, जबकि इसे इस मनमाने निर्णय को वापस लेना चाहिए।
भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के सामान्य रूप से अद्यतन करने के आधार पर चुनाव कराना चाहिए जैसा कि पिछले दो दशकों के दौरान हर चुनाव में किया गया है।
निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार को कहा था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की जरूरत है क्योंकि ये कई कारणों से बदलती रहती हैं और संविधान में प्रावधान है कि केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची का हिस्सा हों और जो नहीं हैं, वो वोट नहीं दे सकें।
आयोग ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब कई विपक्षी दलों ने कहा है कि गहन पुनरीक्षण के कारण राज्य मशीनरी का उपयोग करके बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा है।
भट्टाचार्य ने मंगलवार को एक बयान में कहा, "ईसीआई बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बारे में जितना अधिक स्पष्टीकरण देना चाहता है, उतना ही अधिक भ्रमित और गुमराह होता जाता है।"
उन्होंने सवाल किया कि अब यह कहकर एसआईआर को मामूली विषय बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है कि नामावली को सालाना संशोधित किया जाता है?
वामपंथी नेता ने दावा किया, "केवल नागरिक ही वोट देने के हकदार हैं, लेकिन भारत में पहले कभी भी मतदाताओं से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए नहीं कहा गया था। अब प्रत्येक मतदाता पर संदेह किया जा रहा है और उन दस्तावेजों की मदद से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा रहा है जो भारत में बहुत सारे लोगों के पास अभी भी नहीं हैं।"
उन्होंने कहा, "इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं देता है कि एसआईआर शुरू करने से पहले उसने किसी भी राजनीतिक दल के साथ पूर्व परामर्श क्यों नहीं किया? अचानक इसकी घोषणा क्यों की गई? "
भट्टाचार्य ने सवाल किया कि अब आयोग बिहार के 4.96 करोड़ मतदाताओं के बारे में बात करके झूठी सांत्वना देना चाहता है, जिन्हें दस्तावेज़ जमा नहीं करने होंगे, लेकिन राज्य के उन 3 करोड़ मतदाताओं का क्या, जिन्हें दस्तावेज जमा करना होगा?
उन्होंने कहा कि इस ‘‘मनमाने और पूरी तरह से गलत और गैर-पारदर्शी’’ आदेश को वापस लेना चाहिए और मतदाता सूची के सामान्य अद्यतनीकरण के आधार पर चुनाव कराना चाहिए जैसा कि पिछले दो दशकों में हर चुनाव में किया गया है।
भट्टाचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा ध्यान मतदाताओं को उनके मताधिकार के प्रयोग में सुविधा प्रदान करने पर होना चाहिए, न कि कठिनाइयां पैदा करने और मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने पर।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2025 12:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

