देश की खबरें | ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ पीटीआई के विशेष साक्षात्कार का मूल पाठ

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प्रश्न : भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर शुरू हुई वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में विशेष रूप से रक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में जारी और संभावित भविष्य के सहयोग की समग्र दिशा को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर : ब्रिटेन और भारत के बीच संबंध हमारे दोनों देशों के भविष्य को परिभाषित करेंगे। आज जो संबंध हैं उससे भी कहीं ज्यादा यह संबंध दोनों देशों के भविष्य को परिभाषित करेंगे।

हमारे देशों के करीबी संबंधों और संबद्ध हितों को पहचानते हुए दो साल पहले हम ‘2030 रोडमैप’ पर सहमत हुए थे जो हमारे देशों, अर्थव्यवस्थाओं और लोगों को करीब लाने के लिए एक ऐतिहासिक प्रतिबद्धता थी।

हमने इस रोडमैप के तहत पहले ही बहुत कुछ हासिल कर लिया है, जिसमें उच्च शिक्षा योग्यता की पारस्परिक मान्यता, युवा पेशेवरों के लिए नए वीजा मार्ग और टेस्को, डेलिवरू तथा रेवोलट जैसी ब्रिटिश कंपनियों सहित अरबों नए निवेश सौदे शामिल हैं। ये कंपनियां भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित या विस्तारित कर रही हैं और हजारों नई नौकरियां भी पैदा कर रही हैं।

ब्रिटेन की नौसेना, थलसेना और वायुसेना ने अपने भारतीय समकक्षों के साथ अभ्यास किया है जिससे साझा खतरों से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने की हमारी क्षमता बढ़ी है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाशक्तियों के रूप में ब्रिटेन-भारत की साझा विशेषज्ञता वैश्विक भलाई के लिए नवाचार की सीमाओं को आगे बढ़ा रही है। साथ में, हम एक कोविड-19 टीका भी लेकर सामने आए, जिस पर ब्रिटेन की सरकार की वित्तीय सहायता से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शोध हुआ, एस्ट्राजेनेका ने उसे विकसित किया और भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा बड़े पैमाने पर उसका विनिर्माण किया गया। महामारियों को रोकने से लेकर मानव जीनोम को उजागर करने तक, ब्रिटेन और भारत कल की चुनौतियों से निपटने के लिए आज मिलकर काम कर रहे हैं।

निश्चित तौर पर हम आगे बढ़ने की उम्मीद करते हैं जिसमें पहले मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना भी शामिल है, जिस पर भारत ने पहली बार किसी यूरोपीय देश के साथ सहमति जताई है। मुझे विश्वास है कि हम एक ऐसा समझौता कर सकते हैं जिससे ब्रिटेन और भारत दोनों को फायदा हो।

हमारा व्यापार संबंध पहले से ही सालाना 3.5 लाख करोड़ रुपये का है। मैं चाहता हूं कि यह संख्या और अधिक हो। हमारे देशों के बीच व्यापार का प्रत्येक अंश नयी नौकरियों, उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प और ब्रिटेन तथा भारत के लोगों के बीच मजबूत संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है।

ब्रिटेन-भारत संबंधों को जो चीज वास्तव में अद्वितीय बनाती है, वह हमारे देशों के बीच ‘लिविंग ब्रिज’ है, जिसमें ब्रिटेन में 16 लाख भारतवंशी शामिल हैं और जो हमारे लोगों को संस्कृति, शिक्षा, भोजन, खेल और बहुत कुछ से जोड़ता है।

दुनिया के दो बड़े लोकतंत्रों के तौर पर हमारे लोग हमें परिभाषित करते हैं और आगे बढ़ाते हैं। यही कारण है कि ब्रिटेन, इस अवैध और अकारण रूसी आक्रमण को पराजित करने के लिए तथा खुद यूक्रेन अपनी रक्षा कर सके, इसके लिए युद्धग्रस्त देश (यूक्रेन) का समर्थन करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश के रूप में, यूक्रेन को अपना भविष्य निर्धारित करने का अधिकार है। यदि पुतिन को बिना दंड के किसी संप्रभु पड़ोसी पर आक्रमण करने दिया जाता है तो पूरी दुनिया के लिए इसके भयानक परिणाम होंगे। यूक्रेन के लोगों से ज्यादा कोई भी शांति नहीं चाहता है, लेकिन यह पुतिन हैं जो अपने सैनिकों को वापस बुलाकर कल ही इस युद्ध को समाप्त करने की ताकत रखते हैं।

जब तक वह ऐसा नहीं करते, हम यूक्रेन और दुनिया भर में कमजोर लोगों को पुतिन के युद्ध के भयानक परिणामों से निपटने में मदद करेंगे। इसमें उनके (पुतिन) द्वारा बाजारों में हेरफेर और अनाज की आपूर्ति पर हमलों के कारण भोजन और ऊर्जा की वैश्विक कीमत में वृद्धि शामिल है।

हम जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करने से लेकर जलवायु परिवर्तन से निपटने तक दुनिया के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटा जा सके।

प्रश्न : ब्रिटेन सरकार की ‘सुरक्षा, रक्षा, विकास और विदेश नीति की एकीकृत समीक्षा’ में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ओर ‘झुकाव’ शामिल था और इसमें ‘हमारे साझा हितों की पूरी शृंखला में’ भारत के साथ सहयोग का स्वरूप बदलने का आह्वान किया गया था। दोनों पक्षों ने एक महत्वाकांक्षी ‘रोडमैप 2030’ को भी स्वीकार किया। क्या दोनों पक्ष हिंद-प्रशांत सहित ब्रिटेन-भारत रणनीतिक संबंधों की गति बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि यह (हिंद-प्रशांत) एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें चीन की बढ़ती आक्रामकता देखी गई है? क्या ब्रिटेन सैन्य प्लेटफार्मों के सह-विकास के लिए भारत के साथ महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए भी तैयार है?

उत्तर : वर्ष 2021 में प्रकाशित ब्रिटेन की विदेश नीति रणनीति ने ब्रिटेन और दुनिया के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। यह कुछ ऐसा है जिसकी हमने इस साल पुष्टि की है जब हमने नीति का एक ताजा संस्करण प्रकाशित किया। हिंद-प्रशांत के लिए हमारी प्रतिबद्धता कहीं नहीं जा रही है, ठीक वैसे ही जैसे यह क्षेत्र कहीं नहीं जा रहा है।

यही कारण है कि हम ‘आसियान’ के साथ संवाद भागीदार बनने से लेकर व्यापक एवं प्रगतिशील ट्रांस-पैसिफिक भागीदारी समझौते (सीपीटीपीपी) की सदस्यता तक यहां अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अधिक से अधिक निवेश कर रहे हैं।

भारत पहले से ही 10 साल के भीतर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। यही कारण है कि भारत इस क्षेत्र में इतना महत्वपूर्ण भागीदार है और आम तौर पर इससे भी अधिक है।

मैं निश्चित तौर पर ब्रिटेन और भारत के हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साथ मिलकर और अधिक काम करने की संभावना देखता हूं, जो 2030 रोडमैप के तहत व्यापार, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में पहले ही हो चुके प्रभावशाली सहयोग को आगे बढ़ा रहा है।

प्रश्न : ब्रिटेन में खालिस्तानी समर्थक तत्वों की गतिविधियों को लेकर, खासतौर पर मार्च में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर हमले के बाद भारत में काफी चिंता का माहौल रहा है। दिल्ली में इस तरह की राय है कि भारत-ब्रिटेन संबंधों में खालिस्तान का मुद्दा अवरोध पैदा कर रहा है। आप इसे कैसे देखते हैं?

उत्तर: ब्रिटेन में किसी तरह का उग्रवाद स्वीकार्य नहीं है और मैं हिंसक, विभाजनकारी विचारधाराओं, चाहे वो कैसी भी हों, उन पर काबू पाने और उनसे मुकाबले के सरकार के कर्तव्य को बहुत गंभीरता से लेता हूं।

हम खालिस्तान समर्थक उग्रवाद के खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार में हमारे साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और ब्रिटेन की पुलिस हिंसक गतिविधियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

अगस्त में ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री ने उग्रवाद और भ्रष्टाचार के खतरे से निपटने के लिए हमारे साझा कामकाज के संबंध में नयी दिल्ली में विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की थी। उस यात्रा के दौरान उन्होंने खालिस्तान समर्थक उग्रवाद से निपटने की ब्रिटेन की क्षमता के विस्तार के लिए नये कोष की घोषणा की थी। एक करोड़ रुपये का निवेश खालिस्तान समर्थक उग्रवाद से उत्पन्न खतरे के बारे में हमारी समझ को मजबूत करेगा और ब्रिटेन तथा भारत के बीच पहले से ही चल रहे संयुक्त कार्य का पूरक होगा।

ब्रिटेन के नागरिकों को वैध रूप से इकट्ठा होने और अपना दृष्टिकोण प्रदर्शित करने का अधिकार है, लेकिन वैध विरोध के अधिकार को हिंसक या धमकी भरे व्यवहार तक नहीं ले जाया जा सकता।

प्रश्न : भारत ने ऐसे वक्त जी20 की अध्यक्षता संभाली जब पूरा विश्व यूक्रेन संघर्ष के परिणामों से जूझ रहा था। भारत जलवायु वित्तपोषण, ऋण पुनर्संरचना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे मुद्दों पर आम-सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है। आप जी20 की भारत की अध्यक्षता को कैसे देखते हैं और आगामी जी20 सम्मेलन से किन परिणामों की अपेक्षा की जा सकती है?

उत्तर : भारत ने जी20 की अध्यक्षता ऐसे समय में संभाली है जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

हमने पिछले 12 महीने में मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता में तेजी से बढ़ोतरी देखी है, हमने सूडान में संघर्ष शुरू होते हुए देखा है, नाइजर और गैबॉन में सैन्य तख्तापलट और अफगानिस्तान तथा अन्य स्थानों पर मानवाधिकारों का दमन देखा है।

और, हम जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे मुद्दों का भी सामना कर रहे हैं।

इस देश का कद, विविधता और इसकी असाधारण सफलता का अर्थ है कि भारत जी20 की अध्यक्षता के लिए सही समय पर सही देश है। मैं पिछले एक साल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करता हूं और भारत को इस तरह का वैश्विक नेतृत्व दर्शाते करते हुए देखना सुखद है।

साल 2023 भारत के लिए बड़ा साल है, देशभर में हो रहीं जी20 की विभिन्न बैठकों से लेकर अगले महीने होने वाले क्रिकेट विश्वकप तक-भारत में इस साल निश्चित रूप से सबसे बड़े वैश्विक भूराजनीतिक घटनाक्रम होने वाले हैं।

पिछले एक साल में भारत की यात्रा करने वाले मेरे मंत्रिमंडल के सहयोगी ब्रिटेन-भारत साझेदारी को लेकर नये उत्साह के साथ लौटे हैं। जी20 के कामकाज से परे, इतने सारे लोगों का बैठकों के लिए पूरे देश की यात्रा करना और पूरे भारत में प्रदर्शित अद्वितीय संस्कृतियों की खोज करते हुए भारत की व्यापकता और गहराई को देखना शानदार रहा है।

जब मैं इस सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी से एक बार फिर मिलूंगा तो यह हमारे सामने मौजूद कुछ वैश्विक चुनौतियों पर तथा इनसे निपटने में ब्रिटेन और भारत की बड़ी भूमिका पर बात करने का अवसर होगा। और मैं सप्ताहांत में अपने जी20 के साझेदारों के साथ आगे और बातचीत को लेकर आशान्वित हूं।

हमें प्रतीक्षा करनी होगी और देखना होगा कि सम्मेलन के क्या परिणाम आते हैं। ब्रिटेन निश्चित रूप से सम्मेलन की सफलता के लिए भारत के प्रयासों का समर्थन करने के लिहाज से यहां है।

प्रश्न : जब आप प्रधानमंत्री बने तो भारत में खुशियों की लहर थी। आप अपनी भारतीय जड़ों को किस प्रकार देखते हैं और जब आप देखते हैं कि आपको भारतीय गौरव के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है तो आपके अंदर कैसी भावना होती है?

उत्तर : भारत से जुड़ी मेरी जड़ों और भारत से मेरे संबंधों को लेकर मुझे अत्यंत गर्व है। जैसा कि आप जानते हैं, मेरी पत्नी भारतीय हैं और एक गौरवान्वित हिंदू होने का अर्थ है कि भारत और भारत के लोगों से मेरा हमेशा जुड़ाव रहेगा। प्रधानमंत्री पद पर मेरी नियुक्ति को लेकर भारतीय लोगों की प्रतिक्रिया जबरदस्त और दिल को छू लेने वाली थी।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने जो पहला काम किया, वह डाउनिंग स्ट्रीट (प्रधानमंत्री निवास एवं कार्यालय) में दिवाली के पर्व पर विशेष समारोह का आयोजन था। मुझे कई ब्रिटिश भारतीयों का 10 डाउनिंग स्ट्रीट में स्वागत करने का मौका मिला और पूरी इमारत को रोशनी तथा फूलों से सजा देखना मेरे लिए भावनात्मक तथा गौरवपूर्ण क्षण था।

क्योंकि मेरी कहानी ब्रिटेन में ऐसे कई लोगों की कहानी है जिनका भारत से गहरा और स्थायी नाता है। हमारे देश की ताकत इसकी विविधता में है तथा प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने इसे कई बार प्रत्यक्ष रूप से महसूस भी किया है।

प्रश्न : आप एक असाधारण परिवार से आते हैं। आप मुक्त दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक हैं। आपके सास-ससुर भारत में प्रौद्योगिकी जगत के सबसे नामचीन चेहरों में शामिल हैं। जब आप उनके साथ बैठते हैं तो क्या भारतीय राजनीति, प्रौद्योगिकी की बात करते हैं या ग्रेट ब्रिटेन को चलाने में आपके सामने आ रहीं समस्याओं पर विचार-विमर्श करते हैं?

उत्तर: राजनीति को परिवार से अलग रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन निश्चित रूप से मेरी पत्नी और दो बेटियां मूल्यों के मामले में मेरा बहुत मार्गदर्शन करती हैं, जैसा कि मेरे माता-पिता और सास-ससुर करते हैं।

हम सबसे ज्यादा राजनीतिक रुख क्रिकेट की चर्चा में अपनाते हैं। मैं इस बात से सहमत हूं कि जब क्रिकेट की बात आती है तो मेरी बेटियां भारत का समर्थन कर सकती हैं, अगर वे फुटबॉल की बात आने पर इंग्लैंड का समर्थन करें।

मुझे अपने सास-ससुर पर बहुत गर्व है, मुझे इस बात पर गर्व है कि उन्होंने

साधारण स्तर से शुरूआत कर ऐसी कंपनी बनाई जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सम्मानित कंपनियों में से एक है। यह कंपनी भारत और ब्रिटेन दोनों जगह हजारों लोगों को रोजगार दे रही है। मैं एक ऐसे देश का निर्माण करना चाहता हूं और उसका नेतृत्व करना चाहता हूं जहां कोई भी उनकी जैसी सफलता का अनुसरण कर सके।

जी20 के लिए अक्षता के साथ भारत की यात्रा करना शानदार रहने वाला है और उम्मीद है कि हमें उन कुछ जगहों पर जाने का मौका मिलेगा जहां हम तब गये थे जब छोटे थे। हालांकि हम दोनों इस पूरी यात्रा में बहुत व्यस्त रहेंगे।

प्रश्न : क्या आप इस वर्ष तक महत्वाकांक्षी भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर आशान्वित हैं और क्या इससे दोनों देशों के बीच समग्र व्यापार संबंधों में बदलाव आने की उम्मीद है?

उत्तर : एक आधुनिक, दूरदर्शी मुक्त व्यापार समझौता, हमें 2030 तक ब्रिटेन-भारत व्यापार को दोगुना करने की हमारी साझा महत्वाकांक्षा के मार्ग पर मजबूती से खड़ा कर सकता है। हमारे व्यापार संबंधों का विस्तार करने, और ऐसा पहला यूरोपीय देश बनने का यह अवसर मिलना बहुत उत्साहजनक है जिसके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की है।

व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार तक पहुंच हासिल करने में मदद मिल सकती है, जिसमें भारत के 4.8 करोड़ लघु और मध्यम उद्यम शामिल हैं। हम एक ऐसा समझौता चाहते हैं जो शुल्क और लाल फीताशाही को कम कर दे, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों को ब्रिटेन के उन सामानों तक आसान पहुंच मिल सके जिनका वे पहले से ही आनंद ले रहे हैं।

हमने अध्याय को अंतिम रूप देने में अच्छी प्रगति की है। वार्ता का 12वां दौर पिछले महीने हुआ था और यह अब तक का सबसे कठिन दौर था-जिसमें वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित जटिल, संवेदनशील तथा व्यावसायिक रूप से सार्थक मुद्दे शामिल रहे। अभी भी कुछ रास्ता तय करना बाकी है, लेकिन मुझे विश्वास है कि हम एक ऐसे समझौते पर सहमत होने में सक्षम होंगे जो ब्रिटेन और भारत दोनों के लिए काम करेगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

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