देश की खबरें | आतंकी वित्त-पोषण मामला : एनएससीएन-आईएम नेता अलेमला जमीर की सांविधिक जमानत अर्जी खारिज
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगा विद्रोही समूह नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड- इसाक मुइवा (एनएससीएन-आईएम) की स्वयंभू ‘कैबिनेट मंत्री’ अलेमला जमीर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इस आधार पर ‘डिफॉल्ट’ जमानत देने की मांग की थी कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मामले में अधूरा आरोप-पत्र दायर किया है।
नयी दिल्ली, तीन मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगा विद्रोही समूह नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड- इसाक मुइवा (एनएससीएन-आईएम) की स्वयंभू ‘कैबिनेट मंत्री’ अलेमला जमीर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इस आधार पर ‘डिफॉल्ट’ जमानत देने की मांग की थी कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मामले में अधूरा आरोप-पत्र दायर किया है।
जमीर को आतंकी वित्त-पोषण मामले में गिरफ्तार किया गया है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जमीर की हिरासत के संबंध में समय-समय पर निचली अदालत द्वारा दिये गये आदेशों में कुछ भी गैर-कानूनी या अपुष्ट नहीं था।
अदालत ने कहा, “इसलिए हमारे विचार में, निर्धारित अवधि के भीतर एक पूर्ण आरोपपत्र दाखिल करना उपयुक्त अनुपालन है और ऐसे मामले में कोई ‘डिफॉल्ट’ जमानत नहीं दी जा सकती है, जिसमें बाद में संज्ञान लिया गया हो।”
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने कहा, “अभियुक्त/याचिकाकर्ता (जमीर) की हिरासत को केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता है कि ‘कोर्ट क्लर्क’ द्वारा पृष्ठों के अंकन और अपठनीय दस्तावेजों के संबंध में आपत्तियां उठाने के लिए पर्याप्त समय व्यतीत किया गया था और प्रतिवादी/एनआईए ने आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने के वास्ते कुछ वक्त लिया था तथा आपत्तियों के निराकरण के बाद तीन जुलाई 2020 को विधिवत संज्ञान लिया गया।”
उच्च न्यायालय ने विशेष एनआईए अदालत के तीन जुलाई 2020 के आदेश को चुनौती देने वाली जमीर की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने जमीर को सांविधिक जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपपत्र तय समयसीमा के भीतर दायर किया गया था और अपील को स्वीकारने का पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।
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