देश की खबरें | तेलंगाना में अमृत योजना के तहत जारी निविदाओं की जांच कराई जाए : के.टी. रामाराव
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नयी दिल्ली, 12 नवंबर भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने तेलंगाना में अमृत योजना के तहत जारी 8,888 करोड़ रुपये की निविदाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्र से जांच कराने की मंगलवार को मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने एक रिश्तेदार की कंपनी को 1,137 करोड़ रुपये का ठेका दिया।
रामाराव ने इस मुद्दे पर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात के एक दिन बाद संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार सुजान रेड्डी के स्वामित्व वाली शोधा इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को ठेका दिया गया जबकि कंपनी के पास अपेक्षित तकनीकी और वित्तीय अर्हता नहीं थी।
उन्होंने कहा, ‘‘यह संविधान के अनुच्छेद 191(1) का स्पष्ट उल्लंघन है और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ लाभ के पद के मामले से काफी मिलता-जुलता है।’’
बीआरएस नेता ने दावा किया कि इस तरह की अनियमितता की वजह से उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि अमृत निविदा के आवंटन के मामले में स्थानीय प्राधिकारी ही निर्णय लेने वाले प्राधिकारी हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निश्चित रूप से अपने रिश्तेदार को ठेका दिलाने में सफल हो सकते हैं।’’
अमृत (अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन) योजना के तहत चयनित शहरों में शहरी बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से जलापूर्ति और सीवरेज प्रणालियों में सुधार किया जाता है।
बीआरएस नेता ने कहा कि केंद्र को न केवल इस विशेष मामले की जांच करनी चाहिए, बल्कि तेलंगाना में 8,888 करोड़ रुपये के पूरे अमृत निविदा आवंटन की भी जांच करनी चाहिए।
केटीआर ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री ने अमृत निविदाओं में कथित भ्रष्टाचार की जांच का वादा किया है और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए आगामी संसद सत्र तक का समय मांगा है।
बीआरएस नेता ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की। केटीआर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने ‘स्थानीय भ्रष्टाचार’ पर ध्यान नहीं दिया, जबकि इससे पहले उन्होंने तेलंगाना को कांग्रेस का ‘एटीएम’ कहा था।
केटीआर ने कहा, ‘‘केंद्रीय मंत्री खट्टर ने अमृत निविदा मुद्दे पर कार्रवाई का वादा किया है। अगर केंद्र सरकार संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे का समाधान करने में विफल रहती है, तो हम इसे राज्यसभा में उठाएंगे।’’
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