देश की खबरें | तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर टिप्पणी के लिए राज्यपाल की आलोचना की

चेन्नई, छह जून तमिलनाडु सरकार ने राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की विदेश यात्रा के बारे में राज्यपाल आरएन रवि की अप्रत्यक्ष टिप्पणी पर मंगलवार को कड़ी आपत्ति व्यक्त की और उनसे राजनीतिक बयानबाजी के लिए राजभवन के कार्यालय का इस्तेमाल करने से परहेज करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने हाल में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करके राज्य की अर्थव्यवस्था मे सुधार लाने के प्रयास के तहत सिंगापुर और जापान की यात्रा की थी।

वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने दावा किया कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा को नीचा दिखाया। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री पर एक अप्रत्यक्ष हमला था।

थेनारासु ने कहा, "मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री की आलोचना करने का प्रयास करके राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है, जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2011 में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए चीन का दौरा किया था।"

राज्यपाल ने पांच जून को उधगमंडलम स्थित राजभवन में तमिलनाडु के राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करते हुए कहा था कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक माहौल बनाना होगा।

उन्होंने कहा था, "निवेशक यहां सिर्फ इसलिए नहीं आएंगे, क्योंकि हम उनसे यहां निवेश करने के लिए कहते हैं या हम उनके देश जाकर उनसे बातचीत करते हैं। वे बहुत कड़ी सौदेबाजी करते हैं। देश के कई राज्य हैं जो ऐसा कर रहे हैं।"

राज्यपाल ने कहा था कि हरियाणा में तमिलनाडु के समान प्रत्यक्ष निवेश है। उन्होंने आगे कहा, "हमें वैश्विक निवेशकों के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जिसके लिए आवश्यक कदम उठाने और उचित रूप से कुशल मानव संसाधन तैयार करने होंगे, तभी हम इस अवसर का लाभ उठा पाएंगे।"

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा का उद्देश्य केवल राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार करना होता है।

उन्होंने राज्यपाल से राजनीतिक बयानबाजी करने के लिए राजभवन के कार्यालय का इस्तेमाल करने से परहेज करने का आह्वान किया।

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री की दो देशों की यात्रा के परिणामस्वरूप तमिलनाडु को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले।

उन्होंने बताया कि निवेश के अलावा, तमिलनाडु शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और आश्चर्य कि बात है कि राज्यपाल, विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होने के नाते, शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)