देश की खबरें | तमिलनाडु विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर केंद्र से राज्य को नीट से छूट देने का आग्रह किया

चेन्नई, 28 जून तमिलनाडु विधानसभा ने शुक्रवार को एक बार फिर आम सहमति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से आग्रह किया कि वह राज्य को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) से छूट दे तथा 12वीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने की अनुमति दे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों के विरोध और सदन से बहिर्गमन के बीच पारित प्रस्ताव में केंद्र से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम में संशोधन करने और नीट परीक्षा में कथित अनियमितता के मद्देनजर कई राज्यों में विरोध बढ़ने के चलते देशव्यापी परीक्षा को समाप्त करने का आह्वान किया गया है।

हालांकि, भाजपा की सहयोगी पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) ने मुख्यमंत्री एवं द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। स्टालिन ने तर्क दिया है कि यह परीक्षा भेदभावपूर्ण है और ग्रामीण व गरीब छात्रों को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित करती है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ राज्यों को योग्यता मानदंड के रूप में 12वीं उत्तीर्ण छात्रों को चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश देने के उनके अधिकार से वंचित करती है।

भाजपा नेता एन. नागेंद्रन ने कहा कि नीट की आवश्यकता है क्योंकि इसके कई लाभ हैं।

इस तर्क पर कि गरीब और ग्रामीण छात्रों को परीक्षा के कारण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने से वंचित होना पड़ता है, नागेंद्रन ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और तत्कालीन मुख्यमंत्री ए.के. पलानीस्वामी ने परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले राज्य सरकार के स्कूली छात्रों के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया था।

नागेंद्रन ने कहा, ‘‘नीट की आवश्यकता है। नीट के खिलाफ विधानसभा का प्रस्ताव अस्वीकार्य है और हम बहिर्गमन कर रहे हैं।’’

मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे, क्योंकि 29 जून को समाप्त होने वाले संक्षिप्त सत्र के लिए सभी सदस्यों को कल्लाकुरिचि शराब त्रासदी पर सदन को बाधित करने के लिए निलंबित कर दिया गया था।

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