नयी दिल्ली, 11 अप्रैल पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण को आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में एक निर्णायक क्षण बताया और कहा कि किसी पर दोष मढ़ने या इस कदम का विशेष श्रेय लेने के लिए इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘देश को उम्मीद है कि राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठेंगे और हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की परिपक्वता का प्रदर्शन करेंगे। तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्र की लड़ाई में एक निर्णायक क्षण है।’’
वर्ष 2012-2013 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में कानून मंत्री रहे कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘यह भारत के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ने वाले सभी लोगों को न्याय के दायरे में लाने के राष्ट्र के सामूहिक संकल्प की पुष्टि है।’’
कुमार ने यह भी कहा कि प्रत्यर्पण मामलों में जटिल कानूनी और कूटनीतिक औपचारिकताओं के बावजूद, भारत में संबंधित प्राधिकारियों ने न्याय को कायम रखने और ‘‘2008 में मुंबई में हुए जघन्य आतंकवादी हमलों के शहीदों और पीड़ितों के प्रति अपना कर्ज चुकाने’’ के लिए इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह देखते हुए कि संप्रग सरकार ने 2011 में राणा के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल करके उसके प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया शुरू की थी, यह कहना गलत है कि पूर्ववर्ती सरकार राणा के मामले में लापरवाह थी।’’
कुमार ने कहा कि राणा के सफल प्रत्यर्पण के लिए विशेष श्रेय लेने के वास्ते इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘देश को उम्मीद है कि राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठेंगे, कम से कम आतंकवाद के मामले में और हमारी लोकतांत्रिक राजनीति की परिपक्वता का प्रदर्शन करेंगे।’’
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