देश की खबरें | तबलीगी जमात: दो देशों के 121 नागरिकों को रिहा करने का आदेश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को किर्गिस्तान और बांग्लादेश के 121 नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने के भुगतान पर रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कम सजा देने के अनुरोध वाली अर्जी (प्ली बार्गेन) प्रक्रिया के तहत मामूली जुर्माना स्वीकार कर लिया। मामला यहां कोविड-19 के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान तबलीगी जमात कार्यक्रम में शामिल होकर वीजा नियमों के साथ ही विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 20 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को किर्गिस्तान और बांग्लादेश के 121 नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने के भुगतान पर रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कम सजा देने के अनुरोध वाली अर्जी (प्ली बार्गेन) प्रक्रिया के तहत मामूली जुर्माना स्वीकार कर लिया। मामला यहां कोविड-19 के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान तबलीगी जमात कार्यक्रम में शामिल होकर वीजा नियमों के साथ ही विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित है।

इन बांग्लादेशी नागरिकों की ओर से पेश अधिवक्ता आशिमा मंडला ने बताया कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट जितेंद्र प्रताप सिंह ने 79 बांग्लादेशी नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने के भुगतान पर रिहा करने का आदेश दिया।

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किर्गिस्तान के नागरिकों की से पेश अधिवक्ता फहीम खान ने कहा कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रोहित गुलिया ने किर्गिस्तान के 42 नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने के भुगतान पर रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने उन्हें तब रिहा करने का आदेश दिया जब इस मामले में शिकायतकर्ता डिफेंस कॉलोनी के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, लाजपत नगर के सहायक पुलिस आयुक्त, निजामुद्दीन के पुलिस निरीक्षक ने कहा कि उन्हें फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है।

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हालांकि, किर्गिस्तान के आठ नागरिकों और बांग्लादेश के तीन व्यक्तियों ने अपने खिलाफ आरोपों को स्वीकार नहीं किया और अदालत के समक्ष सुनवाई का दावा किया।

अदालत उनकी ‘प्ली बार्गेन’ याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कम सजा देने का अनुरोध करते हुए दायर की थी।

इस तरह के आवेदन के तहत आरोपी अपना दोष स्वीकार कर लेता है और कम दंड देने की याचना करता है।

दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जिन मामलों में अधिकतम सजा सात वर्ष है, जो अपराध समाज की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित नहीं करते हों और जो अपराध महिला अथवा 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के खिलाफ न हों, उनमें समझौता आवदेन देने की इजाजत होती है।

इन विदेशियों पर वीजा नियमों का कथित उल्लंघन करके निजामुद्दीन में मरकज के कार्यक्रम में शामिल होने के अलावा कोविड-19 के मद्देनजर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने और मिशनरी गतिविधियों में गैरकानूनी तरीके से शामिल होने के भी आरोप हैं।

इन नागरिकों को पूर्व में अदालत ने 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्रदान की थी।

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