देश की खबरें | स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले को लागू नहीं किया गया : संयुक्त किसान मोर्चा

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नयी दिल्ली, 31 मई संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने खरीफ सत्र 2025-26 के लिए 14 फसलों के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की शनिवार को कड़ी निंदा की।

एसकेएम ने एमएसपी की गणना के लिए ‘सी2 प्लस 50 प्रतिशत’ फॉर्मूले को लागू नहीं करने के लिए सरकार की आलोचना की।

विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त मंच ने शनिवार को यहां जारी बयान में कहा कि केंद्र का यह दावा कि उसने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विपणन सत्र 2025-26 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ‘‘बिल्कुल झूठ’’ है।

इसमें कहा गया, ‘‘मूल तथ्य यह है कि सीसीईए (आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति) द्वारा घोषित एमएसपी, स्वामीनाथन आयोग की ‘सी2 प्लस 50 प्रतिशत’ की सिफारिश पर आधारित नहीं है। उदाहरण के लिए, धान के लिए सी2 प्ल्स 50 प्रतिशत की दर 3,135 रुपये प्रति क्विंटल है। सीसीईए द्वारा घोषित धान के लिए एमएसपी 2,369 रुपये प्रति क्विंटल है, जो 766 रुपये प्रति क्विंटल कम है।’’

एसकेएम ने कहा कि भारत में औसत धान उत्पादन 25-30 क्विंटल प्रति एकड़ है और एक एकड़ उत्पादन पर किसान को 19,150 रुपये से 22,980 रुपये तक का नुकसान होगा, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उन्हें दिए जाने वाले 6,000 रुपये से तीन गुना अधिक है।

बयान में कहा गया कि इसी तरह सोयाबीन के लिए ‘सी2 प्लस 50 प्रतिशत’ दर 6,957 रुपये है, जबकि घोषित एमएसपी 5,328 रुपये है और किसानों को प्रति क्विंटल 1,629 रुपये का नुकसान होगा। एसकेएम ने कहा कि सोयाबीन के लिए प्रति एकड़ औसत उत्पादन 6.1 क्विंटल है और इसलिए, प्रति एकड़ सोयाबीन किसानों के को घाटा 9,936 रुपये का होगा।

बयान में कहा गया, ‘‘एसकेएम और देश भर के किसान संघ लगातार प्रधानमंत्री से मांग कर रहे हैं कि 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के घोषणापत्र में किए गए वादे के अनुसार, गारंटीकृत खरीद के साथ एमएसपी के लिए ‘सी2 प्लस 50 प्रतिशत’ फार्मूला लागू किया जाए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा नीत केंद्र सरकार लगातार 12वें साल भी ‘सी2 प्लस 50 प्रतिशत’ की दर से एमएसपी में वृद्धि नहीं करके पूरे भारत के किसानों को धोखा दे रही है।’’

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग की 2006 की सिफारिश के अनुसार, ‘सी2’ का अभिप्राय व्यापक लागत है जिसमें भूमि का अनुमानित किराया मूल्य, पूंजी पर ब्याज और पट्टे पर दी गई भूमि के लिए दिया गया किराया शामिल है।

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