देश की खबरें | झारखंड की निलंबित आईएएस अधिकारी सिंघल को शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत दी

नयी दिल्ली, 10 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने झारखंड कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी पूजा सिंघल को धनशोधन के एक मामले में शुक्रवार को दो महीने की अंतरिम जमानत दी ताकि वह अपनी बीमार बेटी की देखभाल कर सकें।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के नेतृत्व वाली एक पीठ ने पारित किया। पीठ ने यह आदेश झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सिंघल की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में कथित भ्रष्टाचार से उत्पन्न प्रवर्तन निदेशालय की जांच के संबंध में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

पीठ ने कहा, ‘‘हम याचिकाकर्ता को उसकी बेटी की देखभाल के लिए रिहा होने की तारीख से दो महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत देने के इच्छुक हैं।’’

सिंघल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा कर रहे थे। शीर्ष अदालत ने सिंघल को निर्देश दिया कि वे गवाहों को प्रभावित न करें, जैसा कि एजेंसी द्वारा आरोप लगाया गया है और अदालती सुनवाई में शामिल होने के अलावा झारखंड का दौरा नहीं करें।

सुनवाई के दौरान एजेंसी के अधिवक्ता ने दलील दी कि सिंघल की बेटी की "चिकित्सीय देखभाल" की जा रही है और उनके पति एवं लड़की के सौतेले पिता उसकी देखभाल करने के लिए मौजूद हैं।

एजेंसी ने साथ ही यह भी कहा कि आरोपी के रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित किये जाने के संबंध में "गंभीर आशंकाएं" हैं।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले जनवरी में मामले में अधिकारी को एक निश्चित अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी थी और ईडी से उसकी जमानत याचिका पर जवाब मांगा था।

सिंघल 11 मई, 2022 से हिरासत में हैं, जब उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी की गई थी।

ईडी ने राज्य के खान विभाग की पूर्व सचिव सिंघल पर धनशोधन का आरोप लगाया है और कहा है कि उसके दलों ने दो अलग-अलग धनशोधन जांच के तहत कथित अवैध खनन से जुड़े 36 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है।

अमित रंजन

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