देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने रोहिंग्या युवती की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
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नयी दिल्ली, 18 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने कथित हिरासत से रिहाई के अनुरोध वाली 19 वर्षीय रोहिंग्या युवती की याचिका खारिज कर दी और कहा कि उसकी आवाजाही पर प्रतिबंध को अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि युवती को उसके खिलाफ कोई अपराध दर्ज किए बिना विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘इस पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता की गतिविधियां सराय रोहिल्ला इलाके तक ही सीमित हैं और इस उद्देश्य के लिए नौ जून 2022 को विदेशी अधिनियम-1948 के तहत एक उचित आदेश जारी किया गया है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा होने पर, याचिकाकर्ता की गतिविधियों पर प्रतिबंध को अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता है इसलिए कोई प्रभावी निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। रिट याचिका खारिज की जाती है।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता निश्चित रूप से एक अवैध आप्रवासी है।
केंद्र ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता को राष्ट्रीयता के सत्यापन के बाद कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार उसके गृह देश (म्यांमा) में निर्वासित करने की आवश्यकता होगी।
केंद्र ने कहा कि तब तक, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह निर्वासन के लिए उपलब्ध रहे, उसकी गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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