देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय ने ‘‘बेमन से काम ’’ करने के लिए एनसीबी की खिंचाई की

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नयी दिल्ली, 30 जून उच्चतम न्यायालय ने एक मामले में लापरवाही करने और ‘‘बेमन से काम’’ करने के लिए स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की बुधवार को खिंचाई की और मादक पदार्थ मामले में एक आरोपी को जमानत देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘ यदि आप (अभियोजन) इतने लापरवाह हैं, तो हम इस मामले में शामिल क्यों दिखें।’’

भाटी ने पीठ को बताया कि यह अभियोजन पक्ष की ‘‘गलती’’ थी कि उसने उच्च न्यायालय को उस आरोपी के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी नहीं दी थी, जिसे जमानत दी गई है। हालांकि आरोपी को रिहा नहीं किया गया था क्योंकि वह एक अन्य मामले में हिरासत में है।

पीठ ने कहा, ‘‘यह आधा-अधूरा काम क्या है? क्या आपके लोग ईमानदार नहीं हैं? वे बस इतना चाहते हैं कि उनकी जमानत रद्द कर दी जाए।’’ भाटी ने कहा कि वे सभी विस्तृत जानकारी देते हुए अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करेंगी।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि आपकी सरकार मामलों का बचाव करने में पर्याप्त ईमानदार नहीं है, तो हम आपकी सहायता नहीं कर सकते।’’

शुरुआत में भाटी ने पीठ को बताया था कि आरोपी स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (​एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज एक अन्य मामले में हिरासत में है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया है कि प्रतिवादी को पहले ही 10 नवंबर, 2020 के आदेश के तहत उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दे दी गई है, लेकिन उसे रिहा नहीं किया गया है क्योंकि वह किसी अन्य मामले में भी हिरासत में है।’’

पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘‘इस तथ्य के मद्देनजर और वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता को ध्यान में रखते हुए, हम आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि उच्च न्यायालय ने अपनी विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए प्रतिवादी को पहले ही जमानत दे दी है।’’ पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह किसी अन्य मामले में आरोपी को रिहा करने या किसी अन्य आरोपी को लाभ देने का आधार नहीं होना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल नवंबर में पारित अपने आदेश में आरोपी को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि वह लगभग 21 महीने से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया गया है कि आरोपी की कार से 20 किलोग्राम चरस बरामद की गई है।

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