ताजा खबरें | अनुपूरक चर्चा तीन अंतिम रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए केंद्र राज्य की हिस्सेदारी में परिवर्तन कर पांच साल के लिए इसका अनुपात 75:25 किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्यादा बेहतर होता कि यह हिस्सेदारी पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर 90:10 के अनुपात में होती।
उन्होंने कहा कि राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष के लिए केंद्र राज्य की हिस्सेदारी में परिवर्तन कर पांच साल के लिए इसका अनुपात 75:25 किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्यादा बेहतर होता कि यह हिस्सेदारी पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर 90:10 के अनुपात में होती।
नंदा ने कहा कि केंद्रीय योजनाओं के लिए जो धन जारी किया जाता है वह सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों को दिया जाता है और राज्य सरकार के कोष की अनदेखी की जाती है।
उन्होंने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए केंद्र राज्य की हिस्सेदारी में भी बदलाव करने की मांग की और कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केंद्र की हिस्सेदारी कम कर दी गई है जबकि यह बहुत ही अच्छी योजना है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वी विजय साई रेड्डी ने कहा कि संप्रग सरकार के कार्यकाल में नवंबर 2013 के दौरान मुद्रास्फीति की दर सर्वाधिक, 19.93 फीसदी थी जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह 4.7 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने महामारी काल के दौरान कारपोरेट कर घटने की बात की जबकि ऐसा नहीं है और महामारी काल में यह सर्वाधिक 32 फीसदी थी।
रेड्डी ने कहा ‘‘संप्रग सरकार के कार्यकाल में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की जीडीपी शीर्ष दसवें स्थान पर थी जो आज पांचवे स्थान पर है।’’
उन्होंने कहा कि अनुदान की अनुपूरक मांगें देख कर यह बात साफ हो जाती है कि केंद्र सरकार उन्हें बजट में शामिल कर सकती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जीएसटी की क्षतिपूर्ति लगातार कम कर रही है जबकि विभाजन के बाद से आंध्र प्रदेश घोर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
रेड्डी ने कहा कि पोलावरम परियोजना में पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की नीतियों की वजह से इतना अधिक विलंब हो गया है कि अब इसकी लागत ही कई गुना अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अभी भी इस परियोजना के जल्द पूरे होने के आसार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ की बात करती है वहीं दूसरी ओर वह उर्वरक के आठ पीएसयू का निजीकरण करने की योजना बना रही है। यह स्थिति तब है जब देश में उर्वरक की कमी है और देश के पीएसयू इस चुनौती का सामना कर सकते हैं।
रेड्डी ने यह भी कहा कि जिन पीएसयू के निजीकरण की योजना है, वे घाटे में नहीं चल रहे हैं।
जनता दल (यूनाइटेड) सदस्य अनिल प्रसाद हेगड़े ने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात की जा रही है लेकिन इसके लिए सभी राज्यों को केंद्र की ओर से मदद दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उर्वरक की कमी के चलते बाहर से कुछ उर्वरक का आयात किया जा रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयातित उर्वरक की वजह से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों, दोनों जगहों पर बेरोजगारी बढ़ रही है जिसका समाधान निकालना जरूरी है।
असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने कहा कि एक के बाद एक कर दुनिया के देश मंदी की गिरफ्त में आ रहे हैं और विकसित देश भी इससे बच नहीं पाए हैं। ‘‘ऐसी स्थिति में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था उम्मीद जगाती है।’’
उन्होंने कहा कि चीन के साथ लगने वाली भारत की सीमा पर हुए हालिया विवाद का बार बार जिक्र किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि आज 1962 वाली स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि आज भारत खुद को बहुत मजबूत बना चुका है और उससे टकराना आसान नहीं है।
वैश्य ने सीमाई इलाकों में अवसंरचना को और अधिक मजबूत करने की मांग की।
अन्नाद्रमुक सदस्य डॉ एम थंबीदुरै ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि किसानों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं लेकिन इन्हें पर्याप्त नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने तमिलनाडु का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में निवेश पर्याप्त हो रहा है लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति भी ऐसी होनी चाहिए कि और अधिक निवेश आए। इस पर द्रमुक सदस्यों ने आपत्ति जताई। तब थंबीदुरै ने कहा ‘‘यह राज्यों की परिषद है और यहां मुद्दे उठाए जा सकते हैं।’’
चर्चा अधूरी रही।
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