देश की खबरें | आईआईटी रूडकी के शोधार्थियों ने रेडियो पल्सर में अभूतपूर्व बदलाव का पता लगाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के भारतीय और जापानी खगोलविदों के साझा संगठन 'इनपीटीए' ने एक बहुमुखी, संवेदनशील और उन्नत विशालकाय मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) की मदद से रेडियो पल्सर में अभूतपूर्व बदलाव का पता लगाया है ।

देहरादून, सात सितंबर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के भारतीय और जापानी खगोलविदों के साझा संगठन 'इनपीटीए' ने एक बहुमुखी, संवेदनशील और उन्नत विशालकाय मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) की मदद से रेडियो पल्सर में अभूतपूर्व बदलाव का पता लगाया है ।

इनपीटीए या इंडियन पल्सर टाइमिंग एरे को इसी साल इंटरनेशनल पल्सर टाइमिंग ऐरे (आईपीटीए) कंसोर्टियम में भी शामिल किया गया है ।

इस अंतर्राष्ट्रीय सहयोग संगठन का लक्ष्य अब तक पकड़ से दूर रही नैनोहर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों को पकड़ना है।

आईआईटी रूडकी द्वारा यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ब्रह्मांड के मुख्य आकर्षणों में एक पल्सर (पल्सेटिंग रेडियो स्टार्स) बहुत घने मृत तारे हैं जो हर तारे के एक घूर्णन पर रेडियो फ्लैश के साथ आकाशीय प्रकाशस्तंभ के रूप में दिखते हैं। अवधि और आकार के लिहाज से इस चमकते रेडियो सिग्नल या पल्स में बेजोड़ स्थिरता दिखती है ।

उनके पल्स के स्थिर आकार को 'फिंगरप्रिंट' के रूप में देखा जाता है और यह घड़ी की तरह बारीक और सटीक पल्स टिक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। नैनोहर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों का क्षणिक पता लगाने हेतु पल्सरों के समूह के लिए समय के इस टिक को मापना जरूरी है।

नैनोहर्टज गुरूत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए इनटीपीए रेडियो टेलीस्कोप की मदद से एक पल्सर समूह का निरंतर अवलोकन करता रहता है। इस साल अप्रैल और मई में अनवरत अवलोकन के दौरान इस तारे में फिंगरप्रिंट बदलने का सशक्त साक्ष्य मिला जिससे इसकी लय और घड़ी के व्यवहार में बदलाव आया । इस घटना के बाद परिवर्तनों पर नजर रखने के लिए इनपीटीए टीम ने पल्सर का अवलोकन जारी रखा। यूजीएमआरटी से मिलने वाले लो रेडियो फ्रीक्वेंसी अवलोकन से टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इस घटना में दिखने वाला परिवर्तन अब तक के प्रयोगों में प्रयुक्त किसी अन्य पल्सर घड़ी से कहीं अधिक बड़ा है।

इन प्रयोगों में अवलोकन का सटीक समय होना आवश्यक है इसलिए इन बदलावों को ध्यान में रख कर नैनोहर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने में विश्वसनीयता आएगी।

आइआइटी रूडकी के निदेशक प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी ने इस खोज के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान के छात्रों ने यूजीएमआरटी की मदद से इस क्षेत्र में बड़ा योगदान देकर मान बढ़ाया है।

उन्होंने आशा जताई कि न्यूक्लियर एस्ट्रोफिजिक्स में मिली वर्तमान सफलता का लाभ अन्य विषयों को भी मिलेगा।

आइआइटी रुड़की के पीएचडी छात्र जयखोम्बा सिंघा ने कहा, 'नैनोहर्ट्ज गुरुत्वाकर्षण तरंगों को जानने की दिशा में नई खोज हमारे शोध की बड़ी उपलब्धि है ।'

दीप्ति

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