देश की खबरें | पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए: एनएचआरसी प्रमुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने शनिवार को कहा कि यह समय पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का है।

नयी दिल्ली, चार जून राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने शनिवार को कहा कि यह समय पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का है।

उन्होंने कहा कि यह समय कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का है, और पर्यावरण कानूनों के कार्यान्वयन में मानदंडों के ‘‘उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई’’ करने का है।

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ की पूर्व संध्या पर एनएचआरसी द्वारा जारी एक लिखित संदेश में, उन्होंने कहा कि समाज को पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक बिरादरी के एक हिस्से के रूप में, हमें ताजी और स्वच्छ हवा में सांस लेने के लिए उत्सर्जन मानदंडों का पालन करना होगा। हमें अपनी हरित पट्टी को बचाना होगा, गैर-कानूनी खनन को रोकना होगा, प्लास्टिक और घरेलू कचरे के निपटान को बढ़ावा देना होगा।’’

मिश्रा ने कहा, ‘‘जैव-ईंधन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना और परमाणु और पनबिजली प्रौद्योगिकियों के अलावा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को विकसित करने और इसे दूसरों के साथ साझा करना आज की मांग है।’’

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वैश्विक गांव की अवधारणा को तभी साकार किया जा सकता है, जब विकसित अर्थव्यवस्थाएं एक ऐसी दुनिया में रहने के लिए विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लोगों की आवश्यकता और आकांक्षाओं पर गौर करेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें केवल विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर अपेक्षाओं का अधिक बोझ डाले बिना जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अधिक जिम्मेदारी उठाने की जरूरत है।’’

मिश्रा ने कहा कि यह समय कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का है, और पर्यावरण कानूनों के कार्यान्वयन में मानदंडों के ‘‘उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई’’ करने का है।

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ की पूर्व संध्या पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह पृथ्वी पर जीवन को बचाने के वास्ते पर्यावरण की रक्षा की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए 1973 से हर साल पांच जून को मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि लेकिन अब ‘पर्यावरण बचाओ’ नारा नहीं रह गया है और जलवायु परिवर्तन दुनियाभर में लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को पेयजल, भोजन, बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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