देश की खबरें | जेलों में भीड़ कम करने के लिये कदम उठाएं राज्य और केंद्र शासित प्रदेश : गृह मंत्रालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से विचाराधीन कैदियों को राहत प्रदान करने और जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के एक विशिष्ट प्रावधान के कार्यान्वयन सहित कदम उठाने को कहा है।
नयी दि्ली, 17 अक्टूबर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से विचाराधीन कैदियों को राहत प्रदान करने और जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के एक विशिष्ट प्रावधान के कार्यान्वयन सहित कदम उठाने को कहा है।
गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजे पत्र में कहा है कि जेलों में अत्यधिक भीड़, विशेषकर विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या का मुद्दा सरकार के लिए चिंता का विषय रहा है।
उसने कहा कि विचाराधीन कैदियों के लंबी अवधि तक हिरासत में रहने और उनकी कठिनाइयों के मुद्दे के समाधान के लिए वह विभिन्न प्रगतिशील कदम उठा रहा है, जिसमें जेलों से रिहाई चाहने वाले ऐसे कैदियों को राहत प्रदान करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करना भी शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 479 (1), जो एक जुलाई 2024 से लागू हो गई है, ऐसी राहत प्रदान करती है।
धारा 79 के अनुसार यदि किसी विचाराधीन कैदी को कानून के तहत उसके अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम कारावास की आधी अवधि तक हिरासत में रखा गया है तो उसे अदालत द्वारा जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा।
अधिकतम सजा मृत्युदंड या आजीवन कारावास में हालांकि राहत उपलब्ध नहीं है।
बीएनएसएस की धारा 479 (1) के अंतर्गत एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जो इस प्रकार है: ‘बशर्ते कि जहां ऐसा व्यक्ति पहली बार अपराधी है (जिसे अतीत में कभी किसी अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है) तो उसे न्यायालय द्वारा बॉण्ड पर रिहा कर दिया जाएगा, यदि वह उस कानून के तहत ऐसे अपराध के लिए निर्दिष्ट कारावास की अधिकतम अवधि के एक-तिहाई तक की अवधि के लिए हिरासत में रहा हो।’
बीएनएसएस की धारा 479 (3) के तहत, जहां आरोपी व्यक्ति निरूद्ध है, वहां के जेल अधीक्षक पर यह विशिष्ट जिम्मेदारी डाली गई है कि वह ऐसे कैदियों को जमानत पर रिहा करने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन करें।
न्यायालय ने देशभर के जेल अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि जहां भी आरोपी व्यक्ति विचाराधीन कैदी के रूप में निरुद्ध हैं, वहां उनकी जमानत पर रिहाई के लिए धारा 479 की उपधारा (1) में उल्लिखित अवधि का आधा या एक तिहाई समय पूरा होने पर संबंधित न्यायालयों में आवेदन प्रस्तुत किया जाए।
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