पति की क्रूरता के संबंध में मृत्यु से पूर्व पत्नी के बयान धारा 498 ए के तहत स्वीकार्य: उच्चतम न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि पत्नी पर पति द्वारा की गई क्रूरता के संबंध में मृत्यु पूर्व दिए गए पत्नी के बयान साक्ष्य अधिनियम के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत आरोपों की सुनवाई के दौरान स्वीकार्य होंगे।
नयी दिल्ली ,14 मई : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने शुक्रवार को कहा कि पत्नी पर पति द्वारा की गई क्रूरता के संबंध में मृत्यु पूर्व दिए गए पत्नी के बयान साक्ष्य अधिनियम के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत आरोपों की सुनवाई के दौरान स्वीकार्य होंगे.
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने हालांकि कहा कि साक्ष्य स्वीकार किए जाने से पहले कुछ आवश्यक शर्तें पूरी की जानी होंगी. शीर्ष अदालत ने कहा कि पहली शर्त यह है कि मामले में उसकी मृत्यु का कारण प्रश्न के दायरे में आना चाहिए. उच्चतम न्यायालय ने और भी शर्तों का जिक्र किया. यह भी पढ़ें : Delhi Mundka Fire: मुंडका में हुए अग्निकांड में कई लोग लापता, नहीं हो पा रही शवों की शिनाख्त
न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर यह टिप्पणी की. अदालत ने अपने आदेश में उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत बरी कर दिया था, लेकिन धारा 498 ए के तहत दोषी करार दिया था.
(The above story first appeared on LatestLY on May 14, 2022 09:19 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

